केंद्र की GST नीति से कर्नाटक को 10,000 करोड़ का घाटा! सिद्धारमैया बोले- राजस्व पर बुरा असर

कर्नाटक को चालू वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपए के राजस्व की कमी का सामना करना पड़ेगा: सिद्धारमैया


बेंगलुरु, 6 मार्च। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में बदलाव से राज्य के राजस्व संग्रह पर बुरा असर पड़ा है। इसका परिणाम यह हुआ कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य की आय में काफी कमी आई है।

2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करते हुए उन्होंने बताया कि दरों में बदलाव से इस वित्तीय वर्ष में राज्य के राजस्व में लगभग 10,000 करोड़ रुपए की कमी होने की उम्मीद है, जबकि अगले साल यह कमी 15,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, जीएसटी कर्नाटक के लिए सबसे बड़ा कर स्रोत है और यह राज्य के कुल कर राजस्व का 43 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जीएसटी रेवेन्यू कलेक्शन में कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर है।

सिद्धारमैया ने बताया कि वित्तीय वर्ष के बीच में केंद्र द्वारा अचानक जीएसटी दरों को बदलने के बाद राज्य के राजस्व संग्रह में गिरावट आई। 2025-26 में दरों के संशोधन से पहले, राज्य की औसत मासिक जीएसटी वृद्धि (रिफंड के बाद) 10 प्रतिशत थी। लेकिन, दर संशोधन के बाद यह घटकर 4 प्रतिशत रह गई।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जीएसटी संग्रह निराशाजनक रहा है। उन्होंने बताया, “केंद्र सरकार के 2025-26 के बजट अनुमान और रिवाइज्ड अनुमानों की तुलना में जीएसटी संग्रह में 11 प्रतिशत और 2026-27 के बजट अनुमानों में 13.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये आंकड़े 2024-25 में वास्तविक संग्रह से भी कम हैं।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पूरे देश में इस साल जीएसटी संग्रह में 1.3 लाख करोड़ रुपए और अगले साल 2 लाख करोड़ रुपए की कमी होने की संभावना है, जिससे राज्यों को मिलने वाले कर हिस्से में भी कमी आएगी।

सिद्धारमैया ने कहा कि जीएसटी संग्रह में यह गिरावट राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ा रही है। टैक्स संरचना में बदलाव और दरों में सुधार का असर राज्यों के राजस्व पर केंद्र की तुलना में अधिक सीधा पड़ता है।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र सरकार तंबाकू और लग्जरी वस्तुओं पर सेस और अन्य अतिरिक्त लेवी के जरिए राजस्व जुटा रही है और यह पूरी कमाई सीधे केंद्र के खजाने में जाती है।

सिद्धारमैया ने बताया कि कर्नाटक सरकार असल में जीएसटी दरें कम करने का समर्थन करती है, लेकिन राज्यों के वित्तीय हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया। कर्नाटक ने सात अन्य राज्यों के साथ मिलकर जीएसटी काउंसिल को संयुक्त ज्ञापन दिया है, जिसमें राज्य के राजस्व को सुरक्षित रखने और दरों में बदलाव से होने वाले नुकसान की भरपाई के उपाय करने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य केंद्र से जीएसटी कम होने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक मुआवजा देने की लगातार अपील करता रहेगा।

टैक्स डिवोल्यूशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को मिलने वाला केंद्रीय टैक्स का हिस्सा अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि राज्य के अपने कर राजस्व में रुकावटें आई हैं। उन्होंने बताया कि चौदहवें वित्त आयोग ने कर्नाटक के लिए 4.713 प्रतिशत टैक्स डिवोल्यूशन शेयर सुझाया था, लेकिन पंद्रहवें वित्त आयोग ने इसे घटाकर 3.647 प्रतिशत कर दिया, जो 23 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

सिद्धारमैया ने कहा कि पंद्रहवें वित्त आयोग के छह साल के दौरान राज्य को कुल लगभग 65,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, केंद्र ने कमीशन द्वारा सुझाए गए 5,495 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान और 6,000 करोड़ रुपये के राज्य-विशिष्ट अनुदान भी जारी नहीं किए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने सोलहवें वित्त आयोग से टैक्स डिवोल्यूशन का ऐसा फॉर्मूला अपनाने का आग्रह किया था जो इक्विटी और विकास को संतुलित करे और राज्यों के वित्तीय प्रदर्शन और आर्थिक योगदान को सही रूप में मान्यता दे।

सोलहवें वित्त आयोग ने 2026-31 के लिए कर्नाटक के लिए 4.131 प्रतिशत टैक्स शेयर की सिफारिश की है, जो पंद्रहवें आयोग द्वारा सुझाए गए हिस्से से 13 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, राज्य को पहले सुझाए गए 4.713 प्रतिशत हिस्से की बहाली की उम्मीद थी। लेकिन, नई सिफारिश से टैक्स डिवोल्यूशन में असंतुलन को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता है।

सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि आयोग द्वारा नेशनल सकल घरेलू उत्पाद में राज्य के योगदान को टैक्स डिवोल्यूशन फॉर्मूला तय करने का क्राइटेरिया मानना एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि यह राज्यों के आर्थिक प्रदर्शन और विकास क्षमता को पहचानने का अवसर देता है।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि रेवेन्यू में रुकावटों के बावजूद, राज्य सरकार ने आर्थिक विकास, कल्याण कार्यक्रम और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए समझदारी से खर्च प्रबंधन को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने बताया कि सरकार की गारंटी स्कीमों के लागू होने के बाद से, फरवरी 2026 तक राज्य ने कुल 1,21,598 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए जनता से किए अपने वादों को पूरा किया है।

सिद्धारमैया ने आगे कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव और केंद्र से कम टैक्स डिवोल्यूशन के बावजूद, पिछले तीन वर्षों में सरकार ने फिस्कल डिसिप्लिन बनाए रखा है। कर्नाटक फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एक्ट के अनुसार, राज्य ने फिस्कल घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत के अंदर और कुल सार्वजनिक देनदारियों को जीएसडीपी के 25 प्रतिशत के अंदर रखा है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
13,627
Messages
13,664
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top