पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में तीन और नागरिकों को मार डाला

पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में तीन और नागरिकों को मार डाला


क्वेटा, 6 मार्च। प्रमुख मानवाधिकार संगठनों के अनुसार बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा तीन नागरिकों को कथित रूप से मार डाला गया। इससे अशांत प्रांत में जारी हिंसा और उत्पीड़न के चक्र को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं।

बलोच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने बताया कि गंज बख्श का विकृत शव गुरुवार को उसके परिवार को सौंपा गया। वह लगभग तीन महीने पहले लापता हो गया था। उसकी मौत से पुष्टि हुई कि उसे गंभीर यातना दी गई और पाकिस्तान आर्मी की हिरासत में रहने के दौरान उसे मार डाला गया।

गंज बख्श को 27 दिसंबर 2025 को गार्दाई कोलोवा सैन्य चौकी से जबरन गायब किया गया था। इसी बीच, मानवाधिकार संगठन बलोच यकजहती कमिटी (बीवाईसी) ने बलूचिस्तान में दो अन्य नागरिकों की हत्या का खुलासा किया। दिलावर खान और उनके सहयोगी बिलाल अहमद को 4 मार्च की सुबह खारान जिले में पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वाड ने निशाना बनाया।

दिलावर खान मौके पर ही मारे गए जबकि बिलाल अहमद गंभीर रूप से घायल हुए। यह घटना बलूचिस्तान में लक्षित हत्याओं के निरंतर पैटर्न को उजागर करती है, जहां पर स्थानीय लोग व शिक्षक भी अपनी जान और सुरक्षा के लिए लगातार खतरे का सामना कर रहे हैं।

बीवाईसी ने इस कृत्य की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से तुरंत ध्यान देने, घटना की जांच करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाने का आह्वान किया।

संगठन ने नागरिकों के खिलाफ अत्याचारों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि केच जिले के मिनाज़ क्षेत्र के बलोची भाषा के गायक तलिब नज़ीर को 1 मार्च को उनके घर में पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वाड ने गोली मारकर हत्या कर दी।

बीवाईसी ने कहा, “वे एक ऐसे नागरिक थे जिन्होंने बलोची भाषा, संस्कृति और पहचान को संरक्षित और मनाने के लिए अपनी आवाज़ का उपयोग किया। राज्य समर्थित डेथ स्क्वाड को लक्षित हमले के लिए राज्य द्वारा सशक्त किया गया।”

बीवाईसी ने चेतावनी दी कि तलिब नज़ीर की हत्या नागरिकों, कलाकारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, छात्रों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ लक्षित हिंसा के बढ़ते पैटर्न का एक और उदाहरण है।

संगठन ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति की आवाज़ों को दबाने के लिए प्रॉक्सी सशस्त्र समूहों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पूरे प्रांत में “आतंक का माहौल” पैदा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि “जब कलाकारों को उनके घर में उनकी मातृभाषा में गाने के लिए गोली मार दी जाती है, तो यह लचच लोगों पर डाले जा रहे अत्याचार की पूरी गंभीरता को उजागर करता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन अब चुप नहीं रह सकते। जवाबदेही मांग नहीं, बल्कि कर्तव्य है।”

संगठन ने चेतावनी दी कि अगर बलूचिस्तान में तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो पाकिस्तान पूरी स्वतंत्रता के साथ हत्याएँ जारी रखेगा और बलूचिस्तान लगातार रक्तस्राव करता रहेगा।”
 

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