कोलकाता, 5 मार्च। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते टेक्नोलॉजी-ड्रिवन युग में जीआरएसई को अत्याधुनिक और इनोवेटिव प्लेटफॉर्म बनाने चाहिए। उन्होंने जीआरएसई को भारत के विकसित भारत-2047 लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री कोलकाता स्थित जीआरएसई परिसर में कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा, "आज का युग टेक्नोलॉजी का युग है। जीआरएसई को इसी के साथ तालमेल बिठाते हुए ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करने चाहिए जो भारत और दुनिया में शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रतीक बनें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के विकसित भारत-2047 के सपने को साकार करने में जीआरएसई की अहम भूमिका होगी।"
राष्ट्र-निर्माण और ब्लू इकॉनमी में जीआरएसई के योगदान की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय शिपयार्ड भारत के औद्योगिक और रक्षा इतिहास का जीवंत अध्याय हैं। पिछले डेढ़ सदी से जीआरएसई ने भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल को शक्तिशाली युद्धपोत, फ्रिगेट और अन्य जहाज उपलब्ध कराए हैं, जिन्होंने देश के समुद्री हितों की रक्षा की है।
उन्होंने कहा, "जब आपका बनाया हुआ एक आधुनिक युद्धपोत समुद्र की लहरों पर चलता है, तो वह केवल स्टील और मशीनरी का ढांचा नहीं होता। यह हजारों श्रमिकों की मेहनत, इंजीनियरों की नवाचार क्षमता, टेक्नीशियंस की सटीकता और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है।"
रक्षा मंत्री ने जीआरएसई के हर कर्मचारी को सिर्फ नौकरीपेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के महान अभियान का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, स्किल और कमिटमेंट से जीआरएसई ने असंभव को संभव बनाया है। कर्मचारियों से अपील की कि वे इसी उत्साह और समर्पण के साथ काम करते रहें। उन्होंने कहा, "नई चुनौतियां आएंगी, नई तकनीकें आएंगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। लेकिन उसी मेहनत और डेडिकेशन से जीआरएसई भारत और विश्व में शिपबिल्डिंग एक्सीलेंस का चमकता सितारा बनेगा।"
कार्यक्रम में जीआरएसई के कर्मचारियों और उनके परिवारों ने रक्षा मंत्री के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। राजनाथ सिंह ने इसे 'बहुत शानदार' बताते हुए कहा कि यह भारत की विविधता, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक थी।
इस मौके पर जीआरएसई के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) कमोडोर पीआर हरि (सेवानिवृत्त), रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और शिपयार्ड के अन्य सीनियर अधिकारी उपस्थित थे।