ईडी ने खोला सैकड़ों करोड़ के साइबर ठगी गिरोह का राज, चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत दो जालसाज गिरफ्तार

ईडी ने साइबर फ्रॉड के बड़े सिंडिकेट का किया भंडाफोड़, चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित दो गिरफ्तार


नई दिल्ली, 5 मार्च। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हेडक्वार्टर यूनिट नई दिल्ली ने एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले की जांच में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव को 28 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि पूरे देश में भोले-भाले लोगों को विभिन्न डिजिटल स्कीमों के नाम पर ठगा गया और उनसे सैकड़ों करोड़ रुपये की रकम हड़पी गई।

इस घोटाले में निवेश के मौके, पार्ट-टाइम जॉब, क्यूआर कोड आधारित स्कैम, फिशिंग और अन्य लालच देने वाली योजनाओं के जरिए लोगों से पैसे मंगवाए गए। कुल लगभग 641 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। फ्रॉड से जुटाई गई रकम पहले टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए मैनेज किए गए म्यूल अकाउंट्स में जमा की गई। उसके बाद इस पैसे को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर छिपाने के लिए पूरे भारत में डमी और शेल कंपनियों का जाल बिछाया गया। लॉन्ड्रिंग की गई कमाई को भारतीय बैंकों के वीजा और मास्टर डेबिट कार्ड्स के जरिए यूएई के फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘पीवाईपीएल’ में ट्रांसफर किया गया। पीवाईपीएल अबू धाबी ग्लोबल मार्केट फाइनेंशियल सर्विसेज रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा रेगुलेटेड है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले प्रीपेड कार्ड जारी करता है। पीवाईपीएल वॉलेट से पैसा या तो दुबई में एटीएम और पीओएस ट्रांजैक्शन के जरिए निकाला गया या बाइनेंस क्रिप्टो एक्सचेंज पर वर्चुअल डिजिटल एसेट्स में बदला गया। इसके बाद एक जटिल चेन के जरिए कस्टोडियल और नॉन-कस्टोडियल वॉलेट्स से पैसे को बेदाग संपत्ति के रूप में दिखाया गया।

जांच में पता चला कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव, अजय और विपिन यादव जैसे पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स ने मिलकर एक संगठित मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट चलाया था। इस सिंडिकेट ने दिल्ली के बिजवासन इलाके में एक ही पते से 20 से अधिक कंपनियां संचालित कीं। इन कंपनियों में साझेदार और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ओवरलैपिंग थे। केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में भी समानता पाई गई। ये कंपनियां अवैध धन को व्यवस्थित करने और विदेश भेजने के लिए वाहक की भूमिका निभा रही थीं।

28 नवंबर 2024 को अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव के आवास सहित कई ठिकानों पर तलाशी ली गई। अशोक कुमार शर्मा तलाशी के दौरान जानबूझकर भाग गए और ईडी अधिकारियों पर हमला करने का भी आरोप लगा। इस घटना के बाद पुलिस स्टेशन कपासेड़ा, नई दिल्ली में उनके और उनके भाई सुभाष शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। उनके घर से कई शेल कंपनियों के एटीएम कार्ड और चेक बुक जब्त किए गए।

तब से दोनों आरोपी फरार थे और जांच से बचने के लिए एंटीसिपेटरी बेल मांगते रहे। लेकिन आरोपों की गंभीरता और पीएमएलए की धारा 45 की सख्त शर्तों के कारण स्पेशल कोर्ट ने 15 जनवरी 2026 को, दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 फरवरी 2026 को और सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। अंततः दोनों कोर्ट के सामने सरेंडर करने के लिए मजबूर हुए और पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिए गए।

ईडी ने इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान 8.67 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं और दो प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए गए हैं। स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में दो अभियोजन शिकायतें दाखिल की गई हैं, जिन पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है। मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना है।
 

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