नई दिल्ली, 5 मार्च। आंखें शरीर का सिर्फ एक अंग नहीं, बल्कि दुनिया को देखने का साधन हैं। बिना आंखों के जीवन की कल्पना करना भी डरावना अनुभव देता है।
आंखों से रंगीन दुनिया को देखना आसान है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आंखें सिर्फ दुनिया का हाल ही नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक परेशानियों का हाल भी बताती हैं। आंखों का बदलता रंग और निकलने वाला पानी शरीर में कई बीमारियों का संकेत देता है। तो चलिए आज हम आपको आंखों के बदलते रंग के पीछे का कारण बताते हैं।
पहले बात करते हैं पीली आंखों की। पीली आंखें पित्त दोष के कारण होती है और यकृत रोग और उच्च बिलीरुबिन में गड़बड़ का संकेत देती है। पीली आंखों की वजह से शरीर में गर्मी और चक्कर आने की परेशानी बढ़ने लगती हैं। इसके लिए आयुर्वेद में आंवला, गिलोय और हल्दी के सेवन की सलाद ही जाती है।
दूसरे नंबर पर है आंखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल। डार्क सर्कल को हमेशा नींद से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह वात और पित्त दोनों के बढ़ने का संकेत है। यह तनाव, निर्जलीकरण, एलर्जी और एनीमिया की वजह से भी हो सकता है। ऐसा होने पर आहार में खजूर, घी और पानी में भीगी किशमिश का सेवन करना चाहिए।
तीसरे नंबर है पफी आंखें। कई लोगों की आंखे सूजी और फूली-फूली दिखती है। यह कफ दोष की वृद्धि को दिखाता है और गुर्दे पर भार, अत्यधिक नमक और थायरॉइड विकार का भी संकेत हो सकता है। ऐसे में खीरा और धनिया के पानी का सेवन लाभकारी होता है। सिर्फ आंखें ही नहीं बल्कि पीली पलकें भी शारीरिक अस्वस्थता का संकेत देती हैं। यह एनीमिया और विटामिन बी12 की कमी को दर्शाती हैं। ऐसे में आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, अनार और खट्टे फलों का सेवन जरूर करें।
इसके अलावा, आंखों से पानी बहना भी सिर्फ आंखों का विकार नहीं है, यह पित्त और वात दोष के संतुलन को दिखाता है। यह एलर्जी, संक्रमण और आंखों के सूखापन का संकेत होता है। ऐसे में आहार में बादाम, मशरूम और दूध का सेवन अधिक करें। लाल आंखें भी आंखों की बीमारी का संकेत देता है। यह शरीर में बढ़ते संक्रमण और वात की वृद्धि को दिखाता है। इससे आंखों में लालिमा बनी रहती है और आंखें सूजी दिखती है। कई बार यह किडनी में परेशानी का भी कारण हो सकता है।