ईरान पर सोनिया गांधी के लेख से सियासी बवाल, भाजपा ने बताया 'वोट बैंक की राजनीति' का खेल

ईरान मुद्दे पर सोनिया गांधी का लेख, भाजपा ने बताया ‘वोट बैंक राजनीति’


नई दिल्ली, 4 मार्च। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित टारगेट किलिंग को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है।

सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर एक लेख लिखकर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उनके इस लेख पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित बताया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि सोनिया गांधी का लेख यह दर्शाता है कि उनकी चिंता केवल वोट बैंक तक सीमित है। उन्होंने कहा कि भारत को कब और किस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया देनी है, यह पूरी तरह से विदेश नीति का विषय है और इसका निर्णय केंद्र सरकार करती है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2011 में लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी की हत्या के समय क्या तत्कालीन यूपीए सरकार ने कोई औपचारिक टिप्पणी की थी? इसी तरह वर्ष 2006 में इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी दिए जाने पर भी क्या यूपीए सरकार ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी थी?

तुहिन सिन्हा ने कहा कि मिडिल ईस्‍ट संकट के बीच पिछले तीन दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत की और भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा युद्ध की स्थिति को टालने के प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि भारत का दायित्व यह नहीं है कि वह कांग्रेस की सोच के अनुरूप हर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर अनावश्यक बयानबाजी करे।

भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करना रही है कि विश्व के किसी भी हिस्से में आपात स्थिति उत्पन्न होने पर, चाहे वह युद्ध हो या कोविड-19 जैसी महामारी, भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार की लगातार नजर है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

तुहिन सिन्हा ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी यह समझने में असफल रही है कि भारत की विदेश नीति ने ‘गुटनिरपेक्षता’ से आगे बढ़कर ‘नेशन फर्स्ट’ दृष्टिकोण अपनाया है। उनके अनुसार, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में चाहे ईरान और इजरायल के बीच तनाव हो या कोई अन्य वैश्विक संकट, भारत की पहली चिंता अपने नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर जारी है।
 

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