तमिलनाडु भाजपा का DMK सरकार पर हमला: केंद्र के सुरक्षा अलर्ट के बावजूद ईरान समर्थक प्रदर्शनों की इजाजत क्यों? हस्तक्षेप की मांग

तमिलनाडु भाजपा ने ‘ईरान समर्थक’ प्रदर्शनों पर डीएमके सरकार को घेरा, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग


चेन्नई, 3 मार्च। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने मंगलवार को सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के सुरक्षा अलर्ट के बावजूद राज्य में ईरान के समर्थन में प्रदर्शन की अनुमति दी गई।

भाजपा के तमिलनाडु प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने एक बयान में कहा कि डीएमके सरकार ने अपने सहयोगी दलों, जिनमें विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और वामपंथी दल शामिल हैं, को 1 मार्च को चेन्नई में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के विरोध में प्रदर्शन आयोजित करने की इजाजत दी।

रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने शहर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च करने की भी कोशिश की। भाजपा ने दावा किया कि ये प्रदर्शन ऐसे समय में हुए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु दौरे पर थे और 28 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर राज्यों को सतर्क रहने का अलर्ट जारी किया गया था।

प्रसाद ने कहा, "भारत सरकार का रुख 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करता है। कोई भी क्षेत्रीय दल चुनावी लाभ के लिए राष्ट्रीय एकता को कमजोर नहीं कर सकता।" उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रदर्शन राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

भाजपा नेता ने वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन और वाम दलों पर "चयनात्मक आक्रोश" का आरोप लगाते हुए कहा कि वे विदेशों में भारतीयों और हिंदुओं से जुड़े मामलों पर चुप रहते हैं, लेकिन ईरान पर हमलों की निंदा में मुखर हैं। उनके मुताबिक यह "वोट-बैंक की राजनीति" का उदाहरण है।

भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी आग्रह किया कि वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को स्पष्ट निर्देश जारी करें ताकि कानून-व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।

हालांकि, डीएमके और उसके सहयोगी दलों ने भाजपा के इन ताजा आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के अपने अधिकार का बचाव करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य घटनाक्रम के बाद वैश्विक तनाव बढ़ा हुआ है और कई भारतीय राज्यों में सुरक्षा सलाह जारी की गई है।
 

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