मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास: 27 उत्पादों को मिला जीआई टैग, अब पूरे विश्व में होगी खास पहचान

मध्य प्रदेश के उत्पादों की विशिष्ट पहचान, 27 उत्पादों को मिले जीआई टैग


भोपाल 3 मार्च। मध्य प्रदेश के उत्पाद देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। यही कारण है कि बीते कुछ समय में राज्य के 27 उत्पादों को जीआई टैग हासिल हुआ है। जीआई टैग किसी भी उत्पाद की भौगोलिक स्थिति से जुड़ा होता है।

जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है।

दरअसल, वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था। अगर मध्य प्रदेश की बात करें तो अनेक शिल्प कलाओं और कृषि उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर जीआई टैग प्राप्त हुआ है। बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प और ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रहे हैं।

प्रदेश के कहीं और भी उत्पाद हैं, जिन्हें जीआई टैग मिला है। उनमें प्रमुख रूप से चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग और वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी शामिल हैं।

इसी तरह ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा के लहसुन को भी जीआई टैग मिला है।

आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में हैं और संभावना है कि जल्दी ही वे इसमें सफल होंगे।
 

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