बेंगलुरु, 3 मार्च। यूएस-इजरायल-ईरान संघर्ष में भारत के रुख की आलोचना करने पर कर्नाटक भाजपा ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा।
दरअसल, राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि क्या वे किसी देश के प्रमुख की हत्या का समर्थन करते हैं और वेस्ट एशिया में ईरान और अन्य देशों पर हो रहे हमलों की निंदा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में भारत की चुप्पी उसे वैश्विक स्तर पर कमजोर कर रही है।
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि नैतिकता और वैश्विक व्यवस्था पर प्रवचन देने से पहले, राहुल गांधी को यह साफ करना चाहिए कि क्या वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर लगाए गए राजनीतिक धमकी भरे नारों का समर्थन करते हैं।
अशोक ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ‘राजनीतिक धमकी’ से जुड़े मामलों पर चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि चुप्पी का मतलब मिलीभगत है। दुनिया के नेताओं को संयम का पाठ पढ़ाना आसान है। लेकिन, अपनी ही पार्टी में अनुशासन बनाए रखना मुश्किल है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी सच में मानते हैं कि "हिंसा से हिंसा ही होती है," तो क्या वे उस चीज की निंदा करेंगे, जिसे उन्होंने राजनीतिक धमकी का हिस्सा बताया है?
आर. अशोक ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हित, रणनीतिक गहराई और सोच-समझकर की गई कूटनीति पर आधारित होती है, न कि सोशल मीडिया कमेंट्स या हेडलाइन के लिए दिए गए बयान पर।
आर. अशोक ने कहा कि सरकारों को संवेदनशील परिस्थितियों में जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और ऐसे सार्वजनिक बयानों से बचना चाहिए, जो देश के हित या विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।
उन्होंने वेस्ट एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी समुदाय की मौजूदगी का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक बयानबाजी के बजाय परिपक्वता और जिम्मेदारी जरूरी है।
अशोक ने कहा कि अगर राहुल गांधी चाहते हैं कि भारत साफ-साफ अपने रुख को पेश करे, तो उन्हें पहले अपने पार्टी कैडर के भीतर स्पष्ट संदेश देना चाहिए।