नई दिल्ली, 3 मार्च। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं के सामने कई स्वास्थ्य चुनौतियां हैं। बालों का लगातार झड़ना, चेहरे पर अचानक बढ़ते मुंहासे, पीरियड्स का समय पर न आना या बहुत ज्यादा दर्द होना, अक्सर इन समस्याओं को तनाव, उम्र या सामान्य हार्मोनल बदलाव कहकर टाल दिया जाता है।
लेकिन डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार इन सबके पीछे जिंक की कमी पाई जाती है। यह एक मिनरल है, जो शरीर में कम मात्रा में चाहिए होता है, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा होता है।
विज्ञान के अनुसार, जिंक शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत, इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने, हार्मोन संतुलन बनाने और डीएनए निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद की भाषा में समझें तो यह शरीर की धातुओं को मजबूत करता है और अग्नि यानी पाचन शक्ति को संतुलित रखने में मदद करता है। जब शरीर में जिंक की कमी होती है, तो उसका असर धीरे-धीरे बालों, त्वचा और मासिक धर्म चक्र पर दिखाई देने लगता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, वयस्क महिलाओं को रोज लगभग 8 से 12 मिलीग्राम जिंक की जरूरत होती है। जिंक प्रजनन स्वास्थ्य, घाव भरने, इम्यून कोशिकाओं के विकास और हार्मोन संतुलन के लिए जरूरी है।
डॉक्टर बताते हैं कि जिंक एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है। जब इसकी कमी होती है, तो इसका असर सीधे पीरियड्स पर पड़ता है। कभी पीरियड्स देर से आते हैं, कभी बहुत ज्यादा दर्द होता है, तो कभी रक्तस्राव ज्यादा हो सकता है। कई महिलाओं में पीएमएस के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन, सूजन और मूड स्विंग भी बढ़ जाते हैं।
जिंक का संबंध थायरॉयड ग्रंथि से भी जुड़ा है। थायरॉयड शरीर की ऊर्जा और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है। अगर जिंक कम हो, तो थकान, कमजोरी और पीरियड्स की गड़बड़ी साथ-साथ दिख सकती है। यही वजह है कि कुछ महिलाएं लंबे समय तक थकी हुई महसूस करती हैं, जबकि असली कारण जिंक की कमी हो सकता है।
बालों के झड़ने में भी जिंक की भूमिका अहम है। यह हेयर फॉलिकल्स को मजबूत करता है और नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो बाल पतले और कमजोर हो जाते हैं। त्वचा पर मुंहासे बढ़ने की वजह भी यही हो सकती है, क्योंकि जिंक सूजन को कम करने और त्वचा को ठीक रखने में मदद करता है।