नई दिल्ली, 3 मार्च। सनातन धर्म में पंचांग का बहुत महत्व है। यह रोजाना के शुभ-अशुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र और योग की सटीक जानकारी देता है। 4 मार्च बुधवार से चैत्र मास का कृष्ण पक्ष शुरू हो रहा है।
दृक पंचांग के अनुसार, बुधवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है, जो शाम 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण द्वितीया शुरू होगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन प्रतिपदा का मान होगा। नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी सुबह 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, फिर उत्तराफाल्गुनी लगेगा। योग धृति सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा। वहीं, सूर्योदय सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो 4 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक है, जो ध्यान, जप और पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक है। यह नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अच्छा माना जाता है। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक है। अमृत काल देर रात 12 बजकर 54 मिनट से 2 बजकर 32 मिनट तक और निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक है। ये समय पूजा-पाठ, नया काम शुरू करने या शुभ निर्णय लेने के लिए अत्यंत लाभदायक माने जाते हैं।
पंचांग के अनुसार, अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 2 बजे तक है। इसमें कोई नया कार्य या शुभ काम न करें। यमगंड सुबह 8 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 38 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक है। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, वर्ज्य दोपहर 3 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 41 मिनट तक और आडल योग सुबह 7 बजकर 39 मिनट से देर रात 12 बजकर 59 मिनट तक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अशुभ काल में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यात्रा या कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
बुधवार विघ्न विनाशन गणपति और बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ पूजा-पाठ करने से बुध ग्रह शांत होते हैं और सभी विघ्न बाधाओं का नाश होता है।