रांची, 2 मार्च। झारखंड की विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 23 कैदियों को रिहा किया जाएगा। सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आयोजित झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 36वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया।
रिहा होने वाले कैदियों के सामाजिक पुनर्वास, आय सृजन और निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए। बैठक में पार्षद की ओर से अनुशंसित नए मामलों के साथ-साथ पिछली बैठकों में अस्वीकृत 34 प्रस्तावों की भी गहन समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने बिंदुवार विचार-विमर्श के बाद 23 कैदियों की रिहाई पर सहमति दी। निर्णय लेते समय संबंधित न्यायालयों के आदेश, जिलों के पुलिस अधीक्षकों, जेल अधीक्षकों और प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट तथा अपराध की प्रकृति का परीक्षण किया गया, ताकि रिहाई न्यायिक नियमों और सामाजिक सुरक्षा के मानकों के अनुरूप हो।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रिहा किए जाने वाले कैदियों का विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाए और उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि रिहाई के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य की जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए, कौशल विकास कार्यक्रमों में शामिल किया जाए तथा आय के स्थायी साधन उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की जाए।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जिला स्तर पर समन्वयकों की जिम्मेदारी तय कर रिहा कैदियों के पुनर्वास की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिरीक्षक को रिहा होने वाले कैदियों का ट्रैक रिकॉर्ड रखने और संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से डायन-बिसाही जैसे मामलों में बंद रहे कैदियों के संदर्भ में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया, ताकि सामाजिक पूर्वाग्रहों को दूर किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा, विधि विभाग के प्रधान सचिव नीरज कुमार श्रीवास्तव, कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल, तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।