काशी विद्वत परिषद ने दूर किया संशय, जानें कब होगा होलिका दहन और कब खेली जाएगी होली

काशी विद्वत परिषद ने दूर किया संशय, जानें कब होगा होलिका दहन और कब खेली जाएगी होली


वाराणसी, 2 मार्च। होलिका दहन और होली के त्योहार को लेकर लोगों में फैली असमंजस की स्थिति को दूर करते हुए काशी विद्वत परिषद के महासचिव प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी ने स्पष्ट करते हुए बताया कि होलिका दहन 2 मार्च को होगा।

उन्होंने बताया, "इस बार 2 मार्च को होलिका दहन होगा। इसका शुभ मुहूर्त सायंकाल 7.30 बजे से रात 2.40 बजे तक रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदोष काल व्याप्त हो रहा है और 3 मार्च को सूतक लगने वाला है। शास्त्रों में स्पष्ट है कि सूतक काल में किसी भी तरह का उत्सव, हर्षोल्लास या रंग खेलना वर्जित माना जाता है।"

उन्होंने आगे बताया, "3 मार्च को चंद्रग्रहण या सूतक के कारण कोई उत्सव नहीं मनाया जा सकता। वहीं, 4 मार्च को प्रतिपदा तिथि विद्धा नहीं रहेगी। इसलिए होली महोत्सव और रंगोत्सव उसी दिन मनाया जाएगा।"

उन्होंने होलिका दहन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रहलाद के साथ होलिका बैठी थीं और वे खुद जल गईं, जबकि प्रहलाद सुरक्षित रहे। इसी तरह राम नारायण द्विवेदी ने होलिका दहन पर घर की परंपरा के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, "दहन से पहले घर पर माताएं सरसों का तेल, बीज, गाय के गोबर से बने उपलों की मालाएं जैसी चीजों को लाल कपड़े में बांधकर होलिका को अर्पित करती हैं। साथ ही, उनके आज-पास तीन परिक्रमा करते हुए विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। इससे घर में सेहत, तंदुरुस्ती और खुशहाली आती है। बुरी आदतें, नकारात्मकता और घर की परेशानियां होलिका में जलकर खत्म हो जाती हैं।"

उन्होंने रंग खेलने से पहले की प्रक्रिया पर बताया, "रंगोत्सव शुरू करने से पहले अपने इष्ट देवता, गुरु, माता-पिता और सम्मानित लोगों को रंग लगाकर आशीर्वाद लेना चाहिए।"

राम नारायण द्विवेदी ने पर्व को अच्छे से खेलने और नौजवानों को होली को नशे, शरारत और बदतमीजी से दूर रहने की अपील की। उनका कहना है कि ये आदतों समाज में बुरी आदतें फैलाती हैं।

प्रोफेसर द्विवेदी ने कहा, "होली त्योहार समाज में सद्भावना और समर्पण का संदेश देता है। इसमें कोई लिंग भेद या छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब का फर्क नहीं होता। सभी एक साथ खड़े होकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं, माला पहनाते हैं, और खुशी से उत्सव मनाते हैं।"
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top