नई दिल्ली, 2 मार्च। फ्रांस ने ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमले को लेकर सवाल उठाए हैं। फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल को इसकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर फैसला करने के लिए यूएन जैसे मंच बने हुए हैं। अगर मामला वहां, खासकर सुरक्षा परिषद में जाता, तो सैन्य इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल सकती थी।
बारो ने पेरिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस घटना में किसी फ्रांसीसी नागरिक के हताहत होने की खबर नहीं है।
इस बीच, द टाइम्स ऑफ इजरायल ने दावा किया है कि जर्मनी ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल का साथ दे सकता है। राजनीतिक और सैन्य सूत्रों ने इजरायल के आर्मी रेडियो को बताया कि अगर ईरान इस लड़ाई के बीच इलाके के देशों पर हमला करना बंद नहीं करता है, तो जर्मनी ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायली अभियान में शामिल होने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
इजरायली मीडिया आउटलेट के अनुसार जर्मन विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और बुंडेस्टैग की फॉरेन अफेयर्स कमिटी के सदस्यों ने रेडियो स्टेशन को बताया कि अमेरिका के साथ सैन्य हमले की योजना पहले से ही चल रही थी।
रविवार रात ही फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ने एक संयुक्त बयान जारी करके इलाके में ईरानी हमले की निंदा की, और चेतावनी दी कि अगर आवश्यक हुआ तो वे ईरान के खिलाफ “रक्षात्मक कार्रवाई” के लिए तैयार हैं।
कीर स्टार्मर ने एक वीडियो बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने ईरान की मिसाइलों को रोकने के लिए यूएस को यूके के सैन्य बेस इस्तेमाल करने की इजाजत देने पर सहमति जताई। एक रिकॉर्डेड बयान में, प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा, 'हमने इस अनुरोध को मानने का फैसला किया है ताकि ईरान को पूरे इलाके (खाड़ी देशों) में मिसाइलें दागने से रोका जा सके।'
उन्होंने दावा किया कि इसके अलावा, ब्रिटिश जेट 'कोऑर्डिनेटेड डिफेंसिव ऑपरेशन' में तैनात है और उन्होंने 'ईरानी हमलों को पहले ही सफलतापूर्वक रोक दिया है।'