तिरुवनंतपुरम, 2 मार्च। मुख्यमंत्री पिनाराई निजयन ने सोमवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने सैकड़ों घरों को ध्वस्त करके और हजारों लोगों को बेघर करके 'बुलडोजर राज' कायम कर दिया है। उन्होंने कहा कि खम्मम जिले के वेलुगुमातला गांव में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में 700 घरों को ध्वस्त करना बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने बताया कि ये घर विनोबा भावे के नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान भूमिहीन परिवारों को आवंटित भूदान भूमि पर बने थे। मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के, वैध पहचान पत्र रखने वाले लगभग 3,000 लोगों को 25 फरवरी की सुबह बेदखल कर दिया गया। उन्होंने तेलंगाना में कांग्रेस सरकार पर ऐतिहासिक भूदान आंदोलन के सीमित मानवीय उद्देश्यों की भी अवहेलना करने का आरोप लगाया।
विजयन ने येलाहंका में इसी तरह के बेदखली अभियानों का भी जिक्र किया और कहा कि वहां पीड़ित अभी भी जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विजयन ने कांग्रेस पर भाजपा शासित उत्तरी राज्यों के रवैये को अपनाने का आरोप लगाया और पार्टी पर विस्थापन की क्रूर राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पूछा कि कांग्रेस ऐसे अमानवीय उपायों का नेतृत्व और कार्यान्वयन कैसे कर सकती है? उन्होंने आगे कहा कि केरल में कांग्रेस नेतृत्व, जो प्रगतिशील होने का दावा करता है, उसको अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। केरल की पुनर्वास नीतियों से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने आपदा के बाद पुनर्निर्माण में एक नया मानक स्थापित किया है, जहां उसने बड़ी आपदाओं में सब कुछ खो चुके लोगों को घर मुहैया कराए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां केरल भूमिहीनों को भूमि का मालिकाना हक देता है और स्वामित्व को नियमित करता है, वहीं तेलंगाना वैध 'पट्टयम' धारकों को भी 'फर्जी मालिक' बताकर बेदखल कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केरल में वायनाड के मुंडाक्कई-चूरलमाला आपदा के पीड़ितों के लिए सैकड़ों घर बनाने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है।
विजयन ने कहा कि येलाहंका और खम्मम की घटनाएं दिखाती हैं कि कांग्रेस जहां भी सत्ता में आती है, आम नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करती है। उन्होंने दावा किया कि यह पैटर्न सभी राज्यों में एक जैसा है। उनकी इन बातों से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान देखने को मिल सकती है, जिसमें आवास और पुनर्वास एक नया विवाद का मुद्दा बनकर उभरा है।