पाक में ईशनिंदा का खौफनाक हथियार: ईसाई परिवार की संपत्ति हड़पने के लिए झूठे आरोप की धमकी, जांच की मांग

ईशनिंदा की धमकी देकर ईसाई परिवार की संपत्ति पर कब्जे का आरोप, पाक मानवाधिकार संगठन ने जांच की मांग की


इस्लामाबाद, 1 मार्च। पाकिस्तान के शहर गुजरांवाला में एक ईसाई परिवार की संपत्ति पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने और उसे वापस लेने की कोशिश पर ईशनिंदा (ब्लैसफेमी) के झूठे आरोप लगाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। मानवाधिकार संगठन मानवाधिकार फोकस पाकिस्तान (एचआरएफपी) ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

ईरान-आधारित प्रकाशन यूरेशिया समीक्षा की रिपोर्ट के अनुसार, सरवर मसीह और उनका परिवार 23 फरवरी से गंभीर धमकियों का सामना कर रहा है। आरोप है कि उनके एक मुस्लिम पड़ोसी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया और चेतावनी दी कि यदि परिवार ने अपनी संपत्ति वापस लेने की कोशिश की तो उन पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया जाएगा।

एचआरएफपी का कहना है कि कथित रूप से ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल गैरकानूनी जमीन कब्जाने के औजार के रूप में किया गया। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि सरवर मसीह और उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, कब्जे के बाद आरोपित लोगों ने घर पर धार्मिक बैनर, कुरान की आयतें और मदीना की तस्वीरें लगा दीं, ताकि विवाद को धार्मिक रंग दिया जा सके। सरवर मसीह, उनकी पत्नी और उनके भाई ने एचआरएफपी को बताया कि यदि उन्होंने इन बैनरों को हटाने की कोशिश की तो उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया जा सकता है।

परिवार का कहना है कि ऐसे किसी भी कदम से न केवल उनकी जान को खतरा है, बल्कि इलाके के अन्य ईसाई समुदाय की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। गवाहों, जिनमें एक पांच वर्षीय मुस्लिम बच्चा मोहम्मद शाहिद भी शामिल है, ने बताया कि वे इस परिवार को बचपन से जानते हैं और यह संपत्ति उसी परिवार की है।

मसीह परिवार का दावा है कि आरोपितों ने चेतावनी लिखकर लगाई है कि जो भी दरवाजा खोलने या बैनर हटाने की कोशिश करेगा, उस पर इस्लामी सामग्री के अपमान का आरोप लगाया जाएगा और इलाके में घरों को आग के हवाले कर दिया जाएगा।

एचआरएफपी की जांच के अनुसार, मसीह परिवार पिछले सात दशकों से इस संपत्ति में रह रहा है और स्वामित्व को लेकर पहले कभी कोई कानूनी विवाद या अदालती मामला नहीं रहा। परिवार का कहना है कि ईशनिंदा के आरोपों का डर न्याय पाने में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है, क्योंकि पहले भी ऐसे आरोपों के बाद ईसाई घरों पर हमले और आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं।

एचआरएफपी के अध्यक्ष नवीन वाल्टर ने कहा कि यह मामला एक चिंताजनक पैटर्न को दर्शाता है। उन्होंने फैसलाबाद नर्सेस केस और जरनवाला हिंसा जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि निजी विवादों, संपत्ति संघर्ष और कार्यस्थल के तनाव जैसे मामलों में भी ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग किया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति पर कब्जे के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया और न ही आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की। वाल्टर के अनुसार, “ईशनिंदा के आरोपों को लेकर बने भय के माहौल के कारण अक्सर प्रशासन और समुदाय समय पर कार्रवाई करने से हिचकते हैं।”
 

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