ईडी का शिकंजा! साई सूर्य डेवलपर्स की 14.63 करोड़ की अचल संपत्तियां कुर्क, ठगी का पर्दाफाश

साई सूर्य डेवलपर्स मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 14.63 करोड़ की अचल संपत्तियां अटैच


हैदराबाद, 28 फरवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने साई सूर्य डेवलपर्स एवं अन्य के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 14.63 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई है।

ईडी की जांच में सामने आया कि साई सूर्य डेवलपर्स के नाम पर विभिन्न रियल एस्टेट परियोजनाओं में प्लॉट बेचने के नाम पर कई पीड़ितों/निवेशकों के साथ ठगी की गई। कुर्क की गई संपत्तियां एम/एस साई सूर्य डेवलपर्स के नाम दर्ज भूमि खंड (लैंड पार्सल) हैं। ईडी ने यह जांच तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की। इन एफआईआर में एम/एस साई सूर्य डेवलपर्स के प्रोपराइटर सतीश चंद्र गुप्ता एवं अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार, सतीश चंद्र गुप्ता ने कई शिकायतकर्ताओं से प्लॉट दिलाने के नाम पर धनराशि एकत्र की, लेकिन वादे के अनुसार जमीन का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) उनके नाम नहीं कराया, जिससे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई।

ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि सतीश चंद्र गुप्ता ने सुनियोजित और पूर्वनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की योजना तैयार की थी। आरोप है कि वह बिना वैध अनुमति के भूमि लेआउट विकसित कर रहा था, एक ही प्लॉट को कई खरीदारों को बेच रहा था, वैध एग्रीमेंट किए बिना बिक्री राशि वसूल रहा था और रजिस्ट्रेशन के नाम पर झूठे आश्वासन देता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इन कृत्यों के पीछे आम जनता को धोखा देने की पूर्वनियोजित मंशा थी। बड़ी संख्या में निवेशकों को मोटी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि आरोपी और उससे जुड़ी संस्थाओं को अवैध लाभ पहुंचा।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सतीश चंद्र गुप्ता, उसके परिवार के सदस्यों और उसकी प्रोपराइटरशिप/पार्टनरशिप फर्मों के नाम पर कई बैंक खाते संचालित किए जा रहे थे। अब तक कुल 14.63 करोड़ रुपए की प्रोसीड्स ऑफ क्राइम की पहचान की गई है।

यह राशि पीड़ितों से चेक, बैंक ट्रांसफर और नकद भुगतान के माध्यम से एकत्र की गई थी। बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि इन अवैध धनराशियों को जानबूझकर विभिन्न संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों के बीच जटिल लेन-देन के जरिए ट्रांसफर किया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और प्रकृति को छिपाया जा सके। बाद में इन राशियों को विभिन्न उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया, जिससे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
 

Similar threads

Forum statistics

Threads
11,542
Messages
11,579
Members
19
Latest member
Jessantict5434
Back
Top