अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर किया सीधा हमला, परमाणु शक्ति की दौड़ में मध्य-पूर्व में महायुद्ध का खतरा गहराया

मध्य-पूर्व में बढ़ा तनावः अमेरिका एवं इजरायल ने संयुक्त हमले किए, ईरान ने दी 'विनाशकारी' जवाबी कार्रवाई की धमकी


बीजिंग, 28 फरवरी। इजरायल और अमेरिका ने स्थानीय समयानुसार 28 फरवरी को ईरानी राष्ट्रपति भवन सहित कई ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद, ईरान ने तेल अवीव और इज़राइल के अन्य स्थानों पर मिसाइल हमले किए। मध्य पूर्व में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले हुए।

इजरायल ने कहा कि इस ऑपरेशन की तारीख हफ़्तों पहले तय की गई थी, जिसका मकसद ईरानी शासन को उखाड़ फेंकना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन लक्ष्य बताए: ईरानी नौसेना को खत्म करना, ईरान के मिसाइल उद्योग को नष्ट करना और यह सुनिश्चित करना कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप ने संभावित अमेरिकी हताहतों की चेतावनी भी दी। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कहा कि जवाबी कार्रवाई "विनाशकारी" होगी।

ईरान के गृह मंत्रालय ने अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों के संबंध में एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि "शत्रु ने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना की है और वार्ता के दौरान हमले किए हैं।" गृह मंत्रालय सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करेगा। गृह मंत्री ने सभी प्रांतों के गर्वनरों को भी आदेश जारी कर जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी संसाधनों को जुटाने का निर्देश दिया है।

अब तक, ईरान के भीतर लगभग 30 ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं, जिनमें मंत्रियों और सैन्य नेताओं के आवास शामिल हैं, जैसे कि ईरानी राष्ट्रपति भवन, ईरानी खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय, ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन और ईरान में स्थित परचिन सैन्य अड्डा।

ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल और अमेरिका की सहायता करने वाला हर कोई सैन्य अड्डा ईरानी सेना का निशाना बनेगा। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान क्षेत्र में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
 
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