जेएनयू छात्रों को मिली जमानत, पर वेरिफिकेशन के फेर में फंसी रिहाई; तिहाड़ से तुरंत मुक्ति के लिए हाईकोर्ट का रुख

जेएनयू प्रदर्शन मामला: प्रदर्शनकारियों ने हाईकोर्ट का किया रुख, जल्द रिहाई की मांग


नई दिल्ली, 28 फरवरी। जेएनयू प्रदर्शन मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 14 प्रदर्शनकारियों ने अपनी जल्द रिहाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से उनके वकीलों ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को अर्जी सौंपकर मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को सभी 14 प्रदर्शनकारियों को जमानत दे दी थी। हालांकि, जमानत के लिए दाखिल दस्तावेजों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें रिहा नहीं किया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

प्रदर्शनकारियों की ओर से दायर अर्जी में कहा गया है कि चूंकि अदालत जमानत दे चुकी है, ऐसे में दस्तावेजों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें हिरासत में रखना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सत्यापन की औपचारिकता पूरी होने तक उन्हें रिहा किया जाए।

बता दें कि शुक्रवार को छात्रों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि कि आरोपी पेशेवर या आदतन अपराधी नहीं हैं। हालांकि, इस दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों की जमानत का विरोध करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा था कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों की न्यायिक हिरासत जरूरी है। पुलिस ने यह भी आशंका जताई थी कि आरोपियों के दोबारा हिंसा का सहारा लेने की प्रबल आशंका है।

अदालत में दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था, बल्कि प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा की गई। छात्रों की पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हुई, जिसमें पुलिस अधिकारी भी घायल हुए। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी पहले भी कई मौकों पर प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग कर चुके हैं और इस संबंध में पहले भी चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

सुनवाई के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि 4-5 बिना यूनिफॉर्म पहने लोगों ने उसे भीड़ से जबरन खींच लिया, जिससे उसके हाथ पर चोट आई और खून के थक्के बन गए। वहीं, आरोपियों के वकील ने अदालत में कहा कि सभी आरोपी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और इस संबंध में वे अदालत को लिखित आश्वासन देने को भी तैयार हैं।

अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों पर हमला गंभीर मामला है और इसे शांतिपूर्ण विरोध के नाम पर अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जिन धाराओं में मामले दर्ज हैं, उनमें अधिकतम सजा पांच वर्ष तक का प्रावधान है। साथ ही, अदालत ने कहा कि आरोपी पेशेवर या आदतन अपराधी नहीं हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपियों को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
 

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