1 मार्च 2026 से बड़े वित्तीय बदलाव! बैंकिंग, टैक्स, UPI और गैस सिलेंडर के नियम बदलेंगे, जेब पर सीधा असर

बैंकिंग, टैक्स, यूपीआई समेत 1 मार्च 2026 से बदल जाएंगे कई वित्तीय नियम! आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है सीधा असर


नई दिल्ली, 28 फरवरी। देश में हर महीने की शुरुआत कई महत्वपूर्ण वित्तीय और नियामकीय बदलाव के साथ होती है। ऐसे में, मार्च 2026 के पहले दिन भी कई बड़े बदलाव होने वाले हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की बैंकिंग, टैक्स फाइलिंग, डिजिटल पेमेंट और निवेश गतिविधियों पर पड़ सकता है। ये बदलाव केंद्रीय बजट 2026-27, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), सेबी और अन्य नियामक संस्थाओं के निर्देशों के तहत होने वाले हैं।

हर महीने की तरह 1 मार्च को भी तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करेंगी। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम और डॉलर विनिमय दर के आधार पर नई दरें तय होंगी। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव का सीधा असर पड़ सकता है। इसके साथ ही, पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में करदाताओं को बड़ी राहत दी गई है। अब संशोधित आयकर रिटर्न (रिवाइज्ड आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 मार्च कर दी गई है। पहले यह समयसीमा 31 दिसंबर तक थी। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यदि आपने रिटर्न में कोई गलती की है, तो मार्च तक उसे सुधार सकते हैं और संभावित पेनल्टी या नोटिस से बच सकते हैं।

फाइनेंस बिल के तहत 'लेट रिविजन' विंडो भी शुरू की गई है। असेसमेंट ईयर खत्म होने के 9 महीने बाद लेकिन 12 महीने के भीतर संशोधित रिटर्न दाखिल करने पर अब शुल्क देना होगा। 5 लाख रुपए तक की आय वाले करदाताओं को 1,000 रुपए और इससे अधिक आय वालों को 5,000 रुपए शुल्क देना होगा।

इसके अलावा, आईटीआर-यू (अपडेटेड रिटर्न) को री-असेसमेंट मामलों में और अधिक प्रासंगिक बनाया गया है। यदि करदाता को पुनर्मूल्यांकन नोटिस मिलता है, तो वह अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है, लेकिन इसके लिए देय कर और ब्याज पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क देना होगा। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को सभी एजेंसी बैंक खुले रहेंगे, भले ही उस दिन महावीर जयंती का सार्वजनिक अवकाश हो। यह फैसला वित्त वर्ष 2025-26 के समापन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि टैक्स कलेक्शन और सरकारी भुगतान से जुड़े सभी लेनदेन समय पर दर्ज किए जा सकें। इससे खातों का वार्षिक समायोजन सुचारू रूप से हो सकेगा।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (टीआरएआई) ने वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जी कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए नया कदम उठाया है। 15 मार्च 2026 तक सभी क्वालिफाइड स्टॉक ब्रोकर्स (क्यूएसबी) को 1600 सीरीज के नंबर पर शिफ्ट होना होगा। इससे निवेशकों को यह पहचानने में आसानी होगी कि कॉल असली है या फर्जी। अगर 15 मार्च के बाद आपको किसी सामान्य 10 अंकों के मोबाइल नंबर से 'फाइनेंशियल' कॉल आती है, तो सतर्क हो जाएं क्योंकि वह धोखाधड़ी भी हो सकती है।

1 मार्च से सेबी की नई प्रोत्साहन योजना लागू हो रही है। इसके तहत म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को पहले योग्य लंपसम निवेश या पहले साल की SIP राशि का 1% तक प्रोत्साहन मिल सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 2,000 रुपये होगी। इससे निवेशकों तक पहुंच बढ़ने की संभावना है, लेकिन निवेश से पहले उत्पाद की उपयुक्तता जरूर जांचें।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 'नो योर व्हीकल (केवाईवी)' की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब मौजूदा फास्टैग उपयोगकर्ताओं को नियमित केवाईवी सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी, जब तक कोई विशेष शिकायत न हो। साथ ही, 3 मार्च 2026 से कुछ डिजिटल वॉलेट्स में फास्टैग सब-वॉलेट सुविधा भी शुरू की जा रही है, जिससे टोल भुगतान की राशि अलग रखी जा सकेगी।

सरकार डिजिटल फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए मैसेजिंग ऐप्स को सक्रिय सिम कार्ड से लिंक करने का नियम लागू कर सकती है। 1 मार्च से व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल जैसे ऐप्स केवल सक्रिय सिम के साथ ही काम कर सकते हैं। यदि सिम हटाया गया या निष्क्रिय हुआ, तो ऐप्स काम करना बंद कर सकते हैं। इसका उद्देश्य सिम स्वैप और फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकना है।

देश के कुछ बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक न्यूनतम बैलेंस की गणना के तरीके में बदलाव कर सकते हैं। पहले यदि किसी एक दिन बैलेंस कम होता था तो पेनल्टी लग सकती थी, लेकिन अब औसत मासिक बैलेंस (एएमबी) के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा। इससे ग्राहकों को राहत मिल सकती है।

1 मार्च से बड़े मूल्य के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच लागू की जा सकती है, और केवल यूपीआई पिन के बजाय बायोमेट्रिक या अतिरिक्त प्रमाणीकरण की जरूरत पड़ सकती है। इसका उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी को रोकना और यूजर्स की सुरक्षा को मजबूत करना है।
 

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