नई दिल्ली, 28 फरवरी। शनिवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 360 कंपनियां एनएसई और बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म से मुख्य (मेनबोर्ड) स्टॉक एक्सचेंज पर स्थानांतरित (माइग्रेटेड) हो चुकी हैं, जो कि भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है।
बी2के एनालिटिक्स द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म की 199 कंपनियां और एनएसई इमर्ज प्लेटफॉर्म की 158 कंपनियां अब मेनबोर्ड पर लिस्टेड हैं।
माइग्रेशन का मतलब है कि कोई कंपनी अपने शेयरों को एसएमई एक्सचेंज से मुख्य स्टॉक एक्सचेंज पर शिफ्ट करती है, जिससे उसे ज्यादा निवेशकों तक पहुंच और बाजार में बेहतर पहचान मिलती है।
बी2के एनालिटिक्स के सीईओ रिताबन बसु ने कहा कि मेनबोर्ड पर जाने का एक बड़ा फायदा यह है कि कंपनी को खुदरा (रिटेल) और संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाने के बेहतर अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा, "बड़ी पूंजी तक पहुंच के अलावा, मेनबोर्ड पर सूचीबद्ध होने से कंपनी की साख बढ़ती है, जिससे बेहतर प्रतिभा (टैलेंट) को आकर्षित करना आसान होता है। कड़े नियमों का पालन करने से कंपनी का मूल्यांकन भी बेहतर होता है और मेनबोर्ड पर लिस्टिंग से शेयरों में अधिक तरलता (लिक्विडिटी) आती है, जिससे निवेशकों को आसानी से बाहर निकलने का विकल्प मिलता है।"
माइग्रेशन के लिए एसएमई में सूचीबद्ध कंपनियों को बाजार पूंजीकरण, मुनाफा, शेयरहोल्डिंग पैटर्न और अनुपालन से जुड़े कुछ मानकों को पूरा करना होता है।
उदाहरण के लिए, किसी कंपनी का औसत बाजार पूंजीकरण 100 करोड़ रुपए से अधिक होना चाहिए और लगातार तीन साल तक उसका परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) 15 करोड़ रुपए से ज्यादा होना चाहिए। साथ ही किसी भी वर्ष में यह 10 करोड़ रुपए से कम नहीं होना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को कम से कम तीन साल तक एक ही व्यवसाय में काम करना चाहिए और उसकी कुल आय का आधे से अधिक हिस्सा उसके मुख्य कारोबार से आना चाहिए।
सेक्टर के हिसाब से देखें, तो टेक्सटाइल कंपनियों ने सबसे ज्यादा माइग्रेशन किया है, जहां 44 कंपनियां मेनबोर्ड पर पहुंचीं।
इसके बाद मशीनरी, उपकरण और कंपोनेंट सेक्टर की 33 कंपनियां और फूड व तंबाकू सेक्टर की 29 कंपनियां मेनबोर्ड पर सूचीबद्ध हुईं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2023 से एसएमई लिस्टिंग और फंड जुटाने में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2023 में 179 कंपनियों ने 4,823 करोड़ रुपए जुटाए थे, जबकि 2025 में 268 कंपनियों ने 12,105 करोड़ रुपए जुटाए, जो सिर्फ दो साल में दोगुने से भी ज्यादा वृद्धि है।