साप्ताहिक कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1.5 प्रतिशत गिरे, वैश्विक तनाव से निवेशकों में बढ़ी सतर्कता

साप्ताहिक कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1.5 प्रतिशत गिरे, वैश्विक तनाव से निवेशकों में बढ़ी सतर्कता


मुंबई, 28 फरवरी। वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते कमजोरी के साथ बंद हुआ।

वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रहे। हालांकि, भारत के ताजा जीडीपी आंकड़ों में मजबूत वृद्धि दिखी, फिर भी बाजार की धारणा कमजोर रही।

पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। व्यापक बाजार भी दबाव में रहे, जहां निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1 प्रतिशत से अधिक टूटे।

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 961.42 अंक यानी 1.17 प्रतिशत गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 317.90 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ और 25,200 के स्तर से नीचे फिसल गया।

ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा, जबकि आईटी और मीडिया शेयर हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।

बाजार में कमजोरी का मुख्य कारण नकारात्मक वैश्विक संकेत और जारी भू-राजनीतिक चिंताएं रहीं, जिससे निवेशकों की भागीदारी सीमित रही।

सेक्टरवार बात करें तो ऑटो, बैंकिंग, एफएमसीजी, मेटल और रियल्टी शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वहीं आईटी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयरों ने कुछ मजबूती दिखाई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी अपने हालिया ट्रेडिंग रेंज से नीचे निकल गया है, जो निकट अवधि में करेक्शन के संकेत देता है।

एक विश्लेषक ने कहा, "अब 25,400 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है, जबकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।"

विशेषज्ञ के अनुसार, बैंक निफ्टी में भी मुनाफावसूली देखी गई और इसमें नकारात्मक पैटर्न बना है। 60,000-60,200 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि अल्पावधि में बैंक निफ्टी 60,000 से 61,750 के दायरे में कारोबार कर सकता है। इस रेंज से बाहर निकलने पर अगली दिशा तय होगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वेल्थ मैनेजमेंट (रिसर्च) प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, आने वाले सत्रों में भारतीय बाजार सतर्क रुख के साथ सीमित दायरे में रह सकते हैं।

उन्होंने कहा कि घरेलू आर्थिक मजबूती और कुछ सेक्टरों की ताकत से बाजार को सहारा मिल सकता है, लेकिन संस्थागत निवेश प्रवाह और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत में ठोस नतीजा नहीं निकलने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।

हालांकि दोनों देशों ने अगले सप्ताह फिर बातचीत करने के संकेत दिए हैं, लेकिन अमेरिका के अगले कदम और उसके ऊर्जा बाजार व क्षेत्रीय स्थिरता पर असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे बाजारों में सतर्कता का माहौल है।
 
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