बाहर से परफेक्ट पर अंदर से टूटी नैना में संदीपा धर ने खुद को पहचाना, बताई क्यों चुनी यह फिल्म

नैना के किरदार में खुद को तलाशती दिखीं संदीपा धर, बताई इस फिल्म को करने की वजह


मुंबई, 28 फरवरी। अभिनेत्री संदीपा धर हालिया रिलीज फिल्म 'दो दीवाने सहर में' में नजर आई थीं। फिल्म में उन्होंने नैना नाम की लड़की का किरदार निभाया था, जो बाहर से एकदम परफेक्ट लगती है, लेकिन अंदर से वह बहुत अकेली और भावनात्मक रूप से टूटी हुई होती है।

अभिनेत्री ने हाल ही में आईएएनएस से बातचीत में अपने किरदार के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने फिल्म को चुनने की विशेष वजह नैना का किरदार बताया। उन्होंने कहा, "फिल्म में नैना का किरदार मेरे लिए सबसे बड़ा आकर्षण था। बाहर से वह परफेक्ट और खुशहाल दिखती थी, लेकिन अंदर ही अंदर वह बहुत अकेली और इमोशनली टूटी हुई थी। फिल्म में मेरे इस सफर को गहराई से दिखाया गया है। बाहर की परफेक्शन और अंदर की उथल-पुथल को दर्शाना एक्टर के तौर पर मेरे लिए चुनौतीपूर्ण और रोमांचक दोनों था।"

अभिनेत्री ने आगे फिल्म की कहानी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, "बहुत समय बाद एक ऐसी लव स्टोरी दर्शकों के सामने आई है, जो आम नहीं है। यह दो लोगों की कमजोरियों की कहानी है, जो धीरे-धीरे अपनी कमियों को स्वीकार करते हैं और एक-दूसरे को अपनाकर आगे बढ़ते हैं।"

अभिनेत्री ने फिल्म को लेकर कहा कि ऐसी कहानियां कम देखने को मिलती हैं, जहां हीरो-हीरोइन अपनी कमजोरियों को जानते हुए भी एक-दूसरे को चुनते हैं।

रिलीज के बाद संदीपा काफी संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा, "फिल्म रिलीज होने के बाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, क्योंकि यह वैसी ही बनी है, जैसा मैंने सोचा था। मेरा किरदार भी कुछ उसी तरह से देखा गया है। जब उम्मीदें पूरी होती हैं तो बहुत संतुष्टि मिलती है। मुझे पता था कि सेकंड हाफ में मृणाल के साथ मेरा टकराव वाला सीन अगर सही से किया जाए तो हाइलाइट बनेगा और ऐसा ही हुआ। कई लोगों ने उस सीन की खूब तारीफ की और अपने से रिलेट किया।"

फिल्म का निर्देशन रवि उद्यावर ने किया है, वहीं संजय लीला भंसाली के साथ प्रेरणा सिंह, उमेश कुमार बंसल और भरत कुमार मिलकर इसे प्रोड्यूस कर रहे हैं। अभिनेत्री ने सभी की तारीफ करते हुए कहा, "संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन का हिस्सा बनना खास था, क्योंकि उनका विजुअल विजन बहुत मजबूत होता है। हमारे डायरेक्टर रवि उदयवार में भी विजुअल स्टोरीटेलिंग की गहरी समझ है। फिल्म में मुंबई और उत्तराखंड की खूबसूरती को जिस तरह दिखाया गया है, वह लाजवाब है। इससे पूरा अनुभव और मजेदार हो गया।"

उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा, "फिल्म ने अपनी कहानी के जरिए कई गहरे मुद्दों को छुआ हैं, जैसे भाई-बहनों में तुलना, वैलिडेशन की जरूरत, सेल्फ-वर्थ, सिस्टरहुड, फैमिली वैल्यूज और परिवार में कभी-कभी होने वाली टॉक्सिसिटी भी। यह आज के रिश्तों और इमोशनल संघर्षों पर एक सच्चा नजरिया देती है।"
 

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