जापान का चीन पर जोरदार पलटवार: रक्षा क्षमता बढ़ाने पर दुष्‍प्रचार और मिलिट्रीवादी बनने का आरोप पूरी तरह गलत

रक्षा क्षमताओं की आलोचना पर जापान के रक्षा मंत्री का चीन पर पलटवार, दुष्‍प्रचार का लगाया आरोप


टोक्यो, 27 फरवरी। जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने चीन की आलोचनाओं का कड़ा व‍िरोध किया है। स्‍थानीय मीड‍िया के मुताब‍िक, टोक्यो अपनी रक्षा क्षमताओं की मजबूती के प्रयास में लगा हुआ है, ज‍िस पर चीन दुष्‍प्रचार कर रहा है।

जापान की समाचार एजेंसी क्योदो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी से जापानी सरकार की ओर से रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण त‍क सीम‍ित रखने की नीत‍ि को समाप्‍त करने के प्रयास के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “चीन ऐसा प्रचार अभियान चला रहा है मानो जापान फिर से सैन्यवादी बन रहा हो।”

पत्रकारों से बातचीत में कोइजुमी ने कहा कि सरकार का यह निर्णय मुख्य रूप से चीन से उत्पन्न बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों का हवाला दिया।

कोइज़ुमी ने कहा कि 2015 से 2024 के बीच चीन के हथियार निर्यात की कुल कीमत लगभग 17 अरब अमेरिकी डॉलर रही, “जिससे वह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन गया, जबकि जापान शीर्ष 50 में भी शामिल नहीं है।”

जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने नवंबर में संसद में एक सुझाव देते हुए कहा था क‍ि ताइवान पर चीन का हमला जापान की सेल्‍फ-ड‍िफेंस फोर्सेज की प्रतिक्रिया को प्रेरित कर सकता है। इस बयान के बाद चीन ने जापान की कड़ी आलोचना की और कई आर्थिक कदम उठाए। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और आवश्यक होने पर बलपूर्वक मुख्यभूमि के साथ उसके पुनर्मिलन पर जोर देता है।

क्योडो न्यूज ने कोइज़ुमी के हवाले से कहा, "मौजूदा सुरक्षा स्थिति में हमारे लिए यह जरूरी है कि हम किसी खास देश (पुर्जों की खरीद के लिए) पर निर्भर हुए बिना अपनी खुद की रक्षा क्षमताएं विकसित करें।"

पिछले वर्ष दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र में जापान के स्थायी प्रतिनिधि यामाजाकी काज़ुयुकी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री साने ताकाइची की ताइवान संबंधी टिप्पणियों पर चीन की आलोचना को “तथ्यों के विपरीत, आधारहीन और अस्वीकार्य” बताया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव को चीन की ओर से भेजे गए पत्र के जवाब में यामाजाकी काज़ुयुकी ने कहा, “21 नवंबर के चीन के पिछले पत्र की तरह ही किए गए दावे तथ्यों के अनुरूप नहीं हैं, आधारहीन हैं और स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य हैं। जापान का रुख मेरे 24 नवंबर के पत्र में स्पष्ट रूप से बताया गया है। फिर भी जापानी सरकार के निर्देश पर मैं एक बार फिर आपके समक्ष जापान का दृष्टिकोण साझा करना चाहता हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से जापान ने लगातार अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और पालन किया है। कानून के शासन पर आधारित मुक्त और खुली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने और मजबूत करने में सक्रिय योगदान दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जापान की इस अटल नीति को व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। जापान एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि में पूर्णतः अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप योगदान देता रहेगा।”

उन्होंने कहा कि जापान का मानना है कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए और टोक्यो बातचीत के जरिए जवाब देने की इच्छा जाहिर करता है।

उन्होंने कहा कि जापान का मानना है कि मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए और टोक्यो ने संवाद के जरिए जवाब देने की अपनी इच्छा व्यक्त की है।

क्योदो न्यूज के अनुसार, यामाजाकी काज़ुयुकी का यह नवीनतम पत्र उस समय आया जब चीन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि फू-कोंग ने गुटेरेस को दूसरा पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जापान की सैन्य क्षमताओं के विस्तार और सैन्यवाद को पुनर्जीवित करने की महत्वाकांक्षाओं के प्रति अत्यंत सतर्क रहना चाहिए।”
 

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