बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फोर्स की बर्बरता, जनवरी में 107 जबरन गुमशुदगी और 78 हत्याओं का दावा

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फोर्स की बर्बरता, जनवरी में 107 जबरन गुमशुदगी और 78 हत्याओं का दावा


क्वेटा, 27 फरवरी। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों के बढ़ते अत्याचारों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए एक प्रमुख मानवाध‍िकार संगठन ने कहा क‍ि जनवरी में 107 लोगों को जबरन गायब करने और 78 हत्याओं का रिकॉर्ड बनाया गया। अपनी ताजा रिपोर्ट में बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (एचआरसीबी) ने 107 जबरन गुमशुदगी के मामलों को दर्ज किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज 107 मामलों में से 78 लोगों को घरों पर छापेमारी के दौरान अगवा किया गया, जबकि 29 को दूसरे तरीकों से हिरासत में लिया गया।

कथित जिम्मेदार पक्षों के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) 56 मामलों के साथ सबसे अधिक अपहरण में शामिल रही। इसके बाद खुफिया एजेंसियां 32 मामलों में, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) 12 मामलों में और पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड सात घटनाओं में शामिल बताए गए।

जिलों के अनुसार, केच में सबसे अधिक 28 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद क्वेटा में 20 मामले सामने आए। ग्वादर और पंजगुर में क्रमशः 17 और 14 अपहरण दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त, खारान में नौ, खुजदार में छह, कराची में चार, हब और आवारान में तीन-तीन, डेरा बुगती में दो और मस्तुंग में एक मामला दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में बलूचिस्तान भर में कुल 78 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें 77 पुरुष और एक महिला शामिल थे। 44 पीड़ितों की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी।

एचआरसीबी ने कहा, “दर्ज 78 मामलों में कथित मुठभेड़ सबसे अधिक रहीं, जिनकी संख्या 41 थी, इसके बाद 15 फर्जी मुठभेड़ के मामले सामने आए। ड्रोन हमलों में आठ लोगों की मौत हुई, जबकि टारगेट किलिंग और हिरासत में मौत के छह-छह मामले दर्ज किए गए। ऑनर किलिंग सबसे कम रहीं, जिनके दो मामले सामने आए।”

रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना को 41 घटनाओं के साथ सबसे अधिक जिम्मेदार बताया गया। काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट 13 मामलों में और फ्रंटियर कॉर्प्स 11 मामलों में शामिल रही, जबकि डेथ स्क्वॉड और अज्ञात हमलावरों को पांच-पांच घटनाओं से जोड़ा गया।

इसी बीच मानवाधिकार संगठन बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान का अत्यधिक सैन्यीकरण किया गया है और पाकिस्तानी सैन्य चौकियां न केवल राजमार्गों पर बल्कि प्रांत के प्रमुख शहरों के भीतर भी स्थापित की गई हैं।

बीवाईसी ने कहा, “कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं कर सकता। सैन्य चौकियों पर डराना-धमकाना, अपमान और जबरन गुमशुदगियां आम हैं। सैन्य छापेमारी रोजाना जारी है। सैन्य बल घरों में घुस जाते हैं, स्थानीय आबादी को परेशान और प्रताड़ित करते हैं, कीमती सामान लूट लेते हैं और घरों को तोड़ देते या जला देते हैं।”

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों द्वारा कथित अत्याचारों का सिलसिला जारी है, जहां जबरन गुमशुदगियों और न्यायेतर हत्याओं की घटनाएं अभूतपूर्व स्तर पर सामने आ रही हैं।
 
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