नई दिल्ली, 27 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दसवां चीफ कॉन्क्लेव आज से शुरू हो गया। यह दो दिवसीय आयोजन 27 से 28 फरवरी, 2026 तक चलेगा।
इस कॉन्क्लेव में नेपाल आर्मी के पूर्व सेना प्रमुख और भारतीय सेना के ऑनरेरी जनरल भी शामिल हो रहे हैं। नेपाली सेना प्रमुखों को भारतीय सेना में मानद जनरल की उपाधि दिए जाने की परंपरा भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे और भरोसेमंद सैन्य संबंधों का प्रतीक मानी जाती है। यह परंपरा दोनों देशों के साझा मूल्यों, ऐतिहासिक जुड़ाव और मजबूत सैन्य विरासत को दर्शाती है।
भारत और नेपाल के बीच यह अनोखा सैन्य रिश्ता आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था भारत की 'विश्वबंधु' की भावना और 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के अनुरूप है, जिसके तहत भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत और जन-केंद्रित संबंधों को प्राथमिकता देता है। इस तरह के आयोजन दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाते हैं।
कॉन्क्लेव की शुरुआत राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण समारोह के साथ हुई। इसके बाद मौजूदा सेना नेतृत्व और पूर्व सेना प्रमुखों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में ऑपरेशनल तैयारियों, क्षमता विकास और वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस मंच के जरिए वर्तमान और पूर्व सैन्य नेतृत्व के बीच संवाद को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे अनुभवों का आदान-प्रदान संभव हो पाता है और संस्थागत निरंतरता बनी रहती है।
आयोजन के दौरान पूर्व सेना प्रमुख निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कुछ प्रमुख सैन्य संस्थानों और सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा करेंगे। चीफ्स कॉन्क्लेव भारतीय सेना की संस्थागत स्मृतियों को संजोए रखने, पेशेवर संवाद को मजबूत करने और आपसी विश्वास की भावना को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। यह आयोजन सेना के भीतर समन्वय, समझ और परंपराओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।