पुणे, 26 फरवरी। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के दोनों सदनों को जो बात कही, वह भारत को पहले से ही मालूम थी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जान खतरे में थी और यदि अमेरिका की दखलंदाजी न होती तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद माना कि 35 मिलियन लोग मर सकते थे" और उन्होंने युद्ध रोका। हालांकि, भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह स्वतंत्र रूप से चलाया गया और कोई तीसरा पक्ष इसमें मध्यस्थ नहीं था। संघर्ष सीधे दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर्स जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच हॉटलाइन पर बातचीत से 10 मई को समाप्त हुआ।
तहसीन पूनावाला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "हम जानते हैं कि 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ को फोन कर ऑपरेशन सिंदूर रोकने की गुहार लगाई थी। ट्रंप का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत को पाकिस्तान की कमजोरी का पहले से पता था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहबाज शरीफ की मौत भी हो सकती थी, क्योंकि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए।"
उन्होंने भारतीय सेनाओं की सफलता की सराहना की। पूनावाला ने कहा, "चाहे हम किसी भी राजनीतिक विचारधारा के हों, सबसे पहले भारत की इंटेलिजेंस, वायुसेना, नौसेना, थल सेना, और पूरी सशस्त्र बलों को सलाम। ऑपरेशन सिंदूर में मिली कामयाबी अद्भुत थी। भारत ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया।"
पूनावाला ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, "पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है—यदि आप हमारे मुल्क में एक भी भारतीय की जान लेने की कोशिश करेंगे तो भारत आपको माफ नहीं करेगा। हम आपके मुल्क में घुसकर आपको जवाब देंगे।"
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि "गोली के बदले गोला मिलेगा।" पूनावाला ने जोड़ा, "अगर आप हमारे लोगों को मारेंगे तो हम आपके वजीर-ए-आजम को नहीं छोड़ेंगे।"