आस्था और रंगों में डूबा ब्रज! इन तीन मंदिरों में होली का भव्य उत्सव, उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

आस्था के रंगों में डूबा ब्रज: इन तीन मंदिरों में होली का होगा अनोखा उत्सव, पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु


बरसाना, 26 फरवरी। रंग-गुलाल और खुशियों से भरे होली का त्योहार अब बहुत नजदीक है, जिसको लेकर देशभर में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। यूं तो होली पूरी दुनिया में मनाई जाती है, लेकिन ब्रज की होली की बात ही अलग है। ब्रज में होली का खुमार बसंत पंचमी से शुरू हो जाता है और लगभग 40 दिनों तक चलता है।

ब्रज की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि ये भक्ति, परंपरा और उत्सव से भरी एक महाउत्सव है, जिसे देखने हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। 26 फरवरी को बरसाना और नंदगांव में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली खेली जाएगी।

भारत में होली सबसे ज्यादा धूमधाम से उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में मनाई जाती है, जिसे 'ब्रज की होली' भी कहा जाता है। यहां बरसाना के 'श्री लाडली जी महाराज मंदिर' की लट्ठमार और लड्डूमार होली, वृंदावन के 'बांके बिहारी मंदिर' की फूलों की होली और मथुरा के 'द्वारकाधीश मंदिर' की पारंपरिक रूप से रंग-गुलाल से मनाई जाने वाली होली सबसे प्रमुख है।

श्री लाडली जी महाराज मंदिर में लड्डूमार और लठमार होली का अनोखा उत्सव मनाया जाता है। यह प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में स्थित है, जो देवी राधा को समर्पित है। इसे ‘श्री जी मंदिर’, ‘राधा रानी मंदिर’ और ‘बरसाने का माथा’ के नाम से भी कहा जाता है।

इस साल वृंदावन के 'बांके बिहारी मंदिर' में फूलों की होली 28 फरवरी को खेली जाएगी, जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि वृंदावन में फूलों की होली का उत्सव द्वापर युग से चलता आ रहा है। कहा जाता है कि यहां भगवान कृष्ण अपने मित्रों संग प्रिय राधा रानी और गोपियों के साथ फूलों से होली खेला करते थे।

इस खास दिन बांके बिहारी मंदिर और राधा-कृष्ण को फूलों से सजाया जाता है। यहां रंग और गुलाल के बजाय रंग-बिरंगे फूलों की पंखुड़ियों के साथ प्राकृतिक रूप से होली खेली जाती है। मान्यता है कि गुलाब, गेंदा और चमेली के फूलों की खुशबू भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को काफी प्रिय है।

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा के प्रसिद्ध 'द्वारिकाधीश मंदिर' में होली के त्योहार को तिथि के अनुसार पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। मान्यता है कि यहां की होली श्रीकृष्ण के जीवन काल से जुड़ी है। पर्व के दिन मंदिर में आए श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के बाद उनके साथ रंग और गुलाल की होली खेलते हैं।
 
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