मोदी के दूरदर्शी 2006 इजरायल दौरे ने रखी नींव, खेती से तकनीक तक भारत-इजरायल साझेदारी आज रणनीतिक ऊंचाई पर

भारत-इजरायल संबंध: 2006 के दौरे ने मजबूत साझेदारी की रखी नींव, पीएम मोदी के नेतृत्व में खेती से टेक्नोलॉजी तक बढ़ा सहयोग


नई दिल्ली, 26 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव की यात्रा के बाद भारत-इजरायल के द्विपक्षीय संबंध रणनीतिक साझेदारी के उच्च स्तर पर है। इजरायल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है तो किसी भारतीय प्रधानमंत्री को पहली बार इजरायल की संसद 'नेसेट' में संबोधन का अवसर मिला।

'मोदी स्टोरी' में कहा गया है कि भारत की इजरायल के साथ मजबूत साझेदारी की शुरुआत साल 2006 में हुई, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उनका यह जुड़ाव स्पष्ट रूप से विकास के उद्देश्य से था। वे समझना चाहते थे कि पानी की कमी वाले देश ने इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक वॉटर मैनेजमेंट के जरिए खेती में कैसे सफलता हासिल की।

इसमें कहा गया है, "'एग्रीटेक' की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने एडवांस्ड सिंचाई सिस्टम, ग्रीनहाउस खेती, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, डेयरी डेवलपमेंट और हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर का अध्ययन किया। गुजरात और इजरायल के बीच समानताओं को पहचानते हुए उन्होंने गुजरात में पानी की दक्षता को मजबूत करने और किसानों की उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए समाधान ढूंढे। भारत-इजरायल बिजनेस फोरम में उन्होंने 'प्रति बूंद अधिक फसल' के विजन को मजबूत किया, जो बाद में गुजरात की जल नीति का केंद्र बन गया।"

एक दशक से भी अधिक समय बाद 2017 में नरेंद्र मोदी ने इजरायल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर नया इतिहास रचा। उस दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों में एक अहम परिवर्तन किया और रिश्तों को रणनीतिक स्तर तक पहुंचाया। खेती से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन, डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में भी सहयोग बढ़ा। 'मोदी स्टोरी' में कहा गया है कि बेंजामिन नेतन्याहू के साथ पीएम मोदी के मजबूत रिश्ते ने उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के बीच भरोसा बनाने और सहयोग को तेज करने में मदद की।

इस बदलाव के बारे में बात करते हुए 2017 के डेलीगेशन का हिस्सा रहे भारत फोर्ज के प्रबंध निदेशक बाबा कल्याणी कहते हैं, "इन वर्षों में हमने वह सीखा, जो हम पिछले पचास सालों में नहीं सीख पाए थे।"

'मोदी स्टोरी' की ओर से शेयर किए गए एक वीडियो में बाबा कल्याणी ने कहा, "मुझे लगता है कि यह भारतीय बिजनेस डेलीगेशन के लिए एक बहुत ही खास पल था, जो प्रधानमंत्री के साथ इजरायल गया था। प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इजरायल में उद्योग जगत के कई लोगों के साथ बैठकें की थीं। उस समय हमारा फोकस यह समझना था कि इजरायल टेक्नोलॉजी कैसे डेवलप करता है। राउंड टेबल बैठक में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि इजरायल टेक्नोलॉजी बनाने के लिए डिजिटल, आईओटी और एआई का इस्तेमाल कैसे कर रहा है।"

उन्होंने अपने बयान में कहा, "यह पहली बार था जब यह पूरा विचार आया कि डिजिटल और आईओटी क्या हैं। आप इसे बिजनेस, मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर सहित टेक्नोलॉजी बनाने में कैसे इस्तेमाल करते हैं? फोकस सिर्फ डिफेंस टेक्नोलॉजी पर नहीं था। यह एग्रीकल्चर और अन्य कई क्षेत्रों पर भी था। यहीं से भारत और इजरायल के बीच, वहां की कंपनियों और भारतीय कंपनियों के बीच, इस क्षेत्र में सहयोग की प्रक्रिया शुरू हुई। आज पीछे मुड़कर देखें तो हमने वह सीखा है, जो पिछले पचास वर्षों में नहीं सीख पाए थे।"

भारत-इजरायल के संबंधों पर बाबा कल्याणी कहते हैं, "इजरायल में मेरे कई मित्र हैं, जो मुख्य रूप से रक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं, क्योंकि हमारी वहां की तीन कंपनियों के साथ साझेदारी रही है, लेकिन मुझे लगता है कि वे बहुत सहयोगी और सहज थे, सिर्फ इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ एक अद्भुत व्यक्तिगत संबंध स्थापित किया था। मेरा मानना है कि यही मुख्य कारण था और इससे कार्य करने का तरीका ही बदल गया।"

'मोदी स्टोरी' में कहा गया है कि जब प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के साथ अपनी सहभागिता जारी रखे हुए हैं, यह यात्रा निरंतरता और गहराई को दर्शाती है। 2006 में गुजरात में खेती में इनोवेशन लाने की एक खास कोशिश के तौर पर जो शुरू हुआ था, वह अब टेक्नोलॉजी, भरोसे और एक जैसे विजन के आधार पर दो देशों के बीच एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी बन गई है।
 

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