भारत के विकास को मिलेगी नई उड़ान! 30 उच्च क्षमता वाले औद्योगिक-वेयरहाउसिंग हब चिन्हित, इंफ्रास्ट्रक्चर बूम

भारत में 30 हाई-पोटेंशियल इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग हॉटस्पॉट की पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा


मुंबई, 26 फरवरी। गुरुवार को जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 30 ऐसे शहर हैं जो औद्योगिक और वेयरहाउसिंग (गोदाम) क्षेत्र में उच्च संभावनाओं वाले हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहे हैं। इन शहरों में बुनियादी ढांचे के विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि और सरकारी नीतियों के समर्थन के कारण तेज विकास की संभावना है।

कुल 30 में से 8 शहर पहले से स्थापित बाजार हैं, जबकि रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी कोलियर्स ने 22 अन्य उभरते और नए हब की पहचान की है।

रिपोर्ट में इन शहरों की पहचान सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक हब और कंपनी के आंतरिक विश्लेषण ढांचे के आधार पर की गई है, जो पांच प्रमुख मानकों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर आधारित है।

इन मानकों में रणनीतिक औद्योगिक और माल ढुलाई गलियारों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी, आने वाले इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी, प्रस्तावित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी), समुद्री और हवाई संपर्क का विस्तार तथा बड़े एकीकृत टेक्सटाइल हब का विकास शामिल है।

वर्तमान में भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश की जीडीपी में तकरीबन 17 प्रतिशत का योगदान देता है। अनुमान है कि 2035 तक यह हिस्सा बढ़कर करीब 25 प्रतिशत हो जाएगा।

इस पृष्ठभूमि में, औद्योगिक और वेयरहाउसिंग सेक्टर एक तेजी से बढ़ता क्षेत्र बनकर उभर रहा है। आधुनिक व कुशल गोदामों की बढ़ती मांग और संस्थागत निवेश में तेजी से इस क्षेत्र को मजबूती मिल रही है।

कोलियर्स इंडिया के इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सर्विसेज के प्रबंध निदेशक विजय गणेश ने कहा कि औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र की अगली विकास लहर को औद्योगिक और माल ढुलाई गलियारों के विस्तार, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी और बड़े समुद्री व हवाई अड्डा विस्तार परियोजनाओं से बल मिलेगा।

हालिया बजट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने पर जोर देते हुए आर्थिक विकास के संतुलित वितरण को प्राथमिकता दी गई है।

गणेश ने बताया कि सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के लिए प्रति क्षेत्र 5,000 करोड़ रुपए के आवंटन और लाइफ साइंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, केमिकल्स, रेयर अर्थ मिनरल्स और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विशेष पहल से स्थापित बाजारों में दीर्घकालिक वेयरहाउसिंग विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, उभरते और नए बाजारों में निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे।

इन 30 पहचाने गए हाई-पोटेंशियल हॉटस्पॉट का भौगोलिक फैलाव देश के उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और मध्य क्षेत्रों में संतुलित विकास को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 8 'प्राइम हब' पहले से स्थापित मांग केंद्र हैं और भविष्य में और परिपक्व होंगे। वे अपनी बढ़त बनाए रखते हुए नई क्षमता को तेजी से समाहित कर सकेंगे। अनुमान है कि 2030 तक शीर्ष 8 शहरों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग की मांग 50 मिलियन वर्ग फुट से अधिक हो सकती है।

12 'उभरते हब' आने वाले वर्षों में औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स पार्क और मल्टी-मॉडल हब के विकास के साथ तेजी से आगे बढ़ेंगे।

10 'नवोदित हब' ऐसे शहर हैं जहां विकास की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ेगी। इनकी प्रगति मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, नीतिगत समर्थन और निवेशकों की तैयारी पर निर्भर करेगी।
 
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