संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन प्रस्ताव पर भारत-अमेरिका का अप्रत्याशित कदम: शांति वार्ता की आस में क्यों बनाई दूरी

संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन प्रस्ताव पर भारत-अमेरिका ने बनाई दूरी


संयुक्त राष्ट्र, 25 फरवरी। संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी वर्षगांठ पर पेश किए गए युद्धविराम प्रस्ताव पर भारत ने अमेरिका के साथ मतदान से दूरी बनाते हुए अनुपस्थित रहने का फैसला किया। प्रस्ताव में यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन और तत्काल युद्धविराम की मांग की गई थी।

मंगलवार को हुए मतदान में 107 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जिनमें वाशिंगटन के कई सहयोगी देश भी शामिल थे। वहीं 12 देशों ने प्रस्ताव का विरोध किया और 51 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। इस मतदान ने युद्ध समाप्ति के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के बीच मतभेद भी उजागर कर दिए।

अमेरिका का यह कदम असामान्य माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वाशिंगटन को उम्मीद है कि शांति समझौता निकट है और प्रस्ताव के दो अनुच्छेद उसके कूटनीतिक प्रयासों में बाधा बन सकते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते के तहत यूक्रेन से कुछ क्षेत्र छोड़ने का सुझाव दिया है, जिसे कीव ने अस्वीकार कर दिया है।

अमेरिका ने प्रस्ताव के मसौदे से उन अनुच्छेदों को हटाने की मांग की थी, जिनमें महासभा द्वारा यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति 'मजबूत प्रतिबद्धता' दोहराने और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप 'व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति' की बात कही गई थी।

जब इन अनुच्छेदों को हटाने का अमेरिकी प्रस्ताव 11 के मुकाबले 69 मतों से खारिज हो गया (जिसमें भारत उन 62 देशों में शामिल था जिन्होंने मतदान से दूरी बनाई), तब अमेरिका ने अंतिम प्रस्ताव पर भी 'अनुपस्थित' करार दिया। इस दौरान एक असामान्य स्थिति देखने को मिली जब रूस ने अमेरिका के साथ मिलकर अनुच्छेद हटाने के पक्ष में मतदान किया, जबकि वाशिंगटन के सहयोगी देशों ने इसका विरोध किया।

अमेरिका की उप-स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा कि प्रस्ताव के ये संदर्भ चल रही वार्ताओं से ध्यान भटका सकते हैं और व्यापक कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि हम इस युद्ध की शुरुआत के बाद किसी भी समय से अधिक समझौते के करीब हैं।"

रूस की उप-स्थायी प्रतिनिधि अन्ना एवस्तिग्नेयेवा ने भी इसी भावना से सहमति जताते हुए कहा कि अब राजनीतिक समाधान का अवसर खुला है और प्राथमिकता कूटनीति को दी जानी चाहिए। हालांकि ब्रूस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका तत्काल युद्धविराम की मांग का समर्थन करता है।

वहीं फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि अमेरिकी मांग का समर्थन करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

प्रस्ताव में यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका के युद्ध समाप्ति प्रयासों का स्वागत भी किया गया है। साथ ही इसमें कहा गया कि रूस का पूर्ण पैमाने पर आक्रमण चार वर्षों से जारी है और इससे यूक्रेन के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पद संभालने के 24 घंटे के भीतर युद्ध समाप्त करने का दावा किया था, लेकिन अब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। फिर भी अमेरिका मॉस्को और कीव को वार्ता की मेज पर लाने की कोशिश जारी रखे हुए है और पिछले सप्ताह जिनेवा में अमेरिका प्रायोजित वार्ता भी आयोजित की गई थी।

अमेरिका ने कहा है कि उसके वार्ताकार जमीनी हालात को ध्यान में रखते हुए लंबित मुद्दों पर तेजी से समझौता कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।
 

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