'शंकराचार्य पर FIR बदनाम करने की साजिश!': मुकुंदानंद ने योगी सरकार पर मढ़े गंभीर आरोप, न्यायिक जांच की मांग

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर एफआईआर छवि को बदनाम करने की साजिश: मुकुंदानंद ब्रह्मचारी


वाराणसी, 24 फरवरी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने मंगलवार को आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जो कर रही है, वह ठीक नहीं है।"

उन्होंने कहा, "हम यह बात पूरे साहस से कह सकते हैं। हमारे देश के प्रधानमंत्री ने भी कभी ऐसा आरोप नहीं लगाया। शंकराचार्य की दृष्टि में अगर आप आलोचनात्मक दृष्टिकोण देखते हैं, तो जब-जब गलत हुआ है, उन्होंने आवाज उठाई है। देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने आज तक इस तरह की चीज नहीं सोची। इस तरह की चीजें योगी आदित्यनाथ जी के शासनकाल में हुई हैं, जो खुद को हिंदू कहते हैं और गोरखपुर मठ के मठाधीश हैं। न्यायपालिका की ओर से इसकी जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी जल्द से जल्द होना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "इन घृणित आरोपों ने देशवासियों को गहरा आहत किया है। क्या देश में कोई एक वरिष्ठ नेता नहीं है, जो खुलकर बता सके कि शंकराचार्य पर इतने गंभीर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं? फिलहाल, हमें किसी से कोई उम्मीद या आशा नहीं है। हम तो न्यायपालिका के पास पहुंचे हैं। बस इतनी उम्मीद है कि जल्द से जल्द इस पर ट्रायल हो और जो भी प्रक्रिया हो, उसे पूरा करके मामले को खत्म किया जाए।"

उन्होंने कहा, "हम कानूनी विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए हम नहीं कह सकते कि उच्च न्यायालय में क्या होगा। हम केवल अपने वकीलों की सलाह के आधार पर जानकारी दे सकते हैं। इस मामले की अध्यक्षता अधिवक्ता परमेश्वरनाथ मिश्रा कर रहे हैं, जो अन्य वकीलों और शंकराचार्य से सलाह लेकर हाईकोर्ट गए हैं, और हाईकोर्ट में जब हमारा नंबर आएगा, न्यायालय के सामने हमारे अभिवक्ता अपनी बात रखेंगे। हम लोगों को अपनी सुरक्षा का कोई डर नहीं है और डरने का कोई कारण भी नहीं है। हम अपने लोगों के बीच रहकर पूरी तरह सुरक्षित हैं। भगवान हमारी सुरक्षा कर रहे हैं। जो लोग हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, वे अपनी ही दुनिया में हैं। चिंता बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए है।"

मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने कहा, "उत्तर प्रदेश की पुलिस, प्रदेश की सरकार और जो भी प्रशासन के लोग हैं, उनको देश के बच्चों का संरक्षण करना चाहिए। जो बाल कल्याण समिति है, उन बच्चों का संरक्षण करे ताकि उन बच्चों के साथ कोई अन्याय दोबारा न हो सके।"

उन्होंने आगे कहा, "यह घटना सिर्फ शंकराचार्य की छवि को बदनाम करने का रास्ता है। प्रशासन ने संत, बच्चे, वृद्ध, संन्यासी, और शंकराचार्य के पालने को घसीटा और हम पर भी हाथ उठाया। उत्तर प्रदेश सरकार से सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिसके ऊपर 20 से ज्यादा मुकदमे हैं, उन अपराधियों को आपने आरोप लगाने के लिए छोड़ कैसे दिया है? इस तरह का झूठा मनगढ़ंत आरोप लगाने के लिए उन्हें शर्म आनी चाहिए और न्यायालय को उन्हें दंडित करना चाहिए।"
 

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