ग्वालियर, 24 फरवरी। मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत महिला सशक्तीकरण की दिशा में पढ़ी-लिखी घरेलू महिलाओं के सपनों को पूरा करने का काम किया जा रहा है। इस योजना ने ग्वालियर की मीनाक्षी नागर के सपनों को पंख लगा दिया है। वह योजना का लाभ लेकर न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार का सृजन भी कर रही हैं।
ग्वालियर शहर के सराफा बाजार में रहने वाली मीनाक्षी नागर ने मार्केटिंग विषय से एमबीए किया हुआ है, लेकिन उन्होंने नौकरी की बजाए उद्योग इकाई लगाने का मन बनाया और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) मददगार साबित हुआ, जिसके तहत उन्हें 7 लाख रुपए का लोन और 1 लाख 75 हजार रुपए का अनुदान मिला। इससे उन्होंने मशीन खरीदकर औद्योगिक इकाई शुरू की, जिसमें पूजा-पाठ के लिए हर्बल सामग्री तैयार की जाती है।
उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से उनका वार्षिक टर्न ओवर करीब 20 लाख रुपए से अधिक है।
मीनाक्षी नागर ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उनका हमेशा से सपना था कि वे ग्वालियर से बाहर जाए बिना कुछ अलग और सार्थक कार्य करें। उन्होंने कहा कि उनके ससुर का हमेशा यह मानना था कि समाज में गाय की जो दुर्दशा हो रही है, उसे समझने और सुधारने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को लेनी चाहिए। परिवार में शुरू से ही यह संस्कार दिए गए कि गाय को केवल एक जानवर नहीं, बल्कि ‘गौ माता’ के रूप में सम्मान देना चाहिए।
मीनाक्षी ने बताया कि उनके ससुर ने उन्हें समझाया कि गाय केवल दूध देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसके गोबर और अन्य उत्पादों में भी अपार संभावनाएं छिपी हैं। उनका मानना था कि यदि हम अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करें तो न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं। जब हमारे पास इतनी संभावनाएं घर में ही मौजूद हैं तो बाहर जाकर कमाने की क्या जरूरत है। इसी सोच ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने ससुर से पूछा कि वे इस दिशा में क्या कर सकती हैं, तो उन्होंने सुझाव दिया कि गोबर से धूपबत्ती, खाद और मूर्तियां बनाई जा सकती हैं। इसके बाद मीनाक्षी ने गोबर से धूपबत्ती बनाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाली कई धूपबत्तियों में रसायनों का उपयोग होता है, जबकि उनकी बनाई धूपबत्ती पूरी तरह प्राकृतिक है और किसी भी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है।
मीनाक्षी नागर ने आगे बताया कि धूपबत्ती के अलावा वे हवन सामग्री और वर्मी कंपोस्ट खाद भी तैयार कर रही हैं। उनके इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। उनका मानना है कि पारंपरिक संसाधनों के आधुनिक उपयोग से न केवल पर्यावरण संरक्षण संभव है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
मीनाक्षी नागर ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत की और आज एक सफल उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं। ग्वालियर की मीनाक्षी बताती हैं कि सराफा बाजार में उनकी औद्योगिक इकाई है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। इकाई में इस्तेमाल होने वाले गोबर के लिए उन्होंने तीन गाय पाल रखी हैं। गाय के गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन के लिए सामग्री आदि बनाई जाती हैं। वे बताती हैं कि उनके उत्पादों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ग्वालियर सहित प्रदेश और देश के अन्य शहरों में भी इन उत्पादों की मांग है। वे अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने उत्पाद बेच रही हैं। नाइजीरिया और कनाडा जैसे देशों में भी हमारे हर्बल उत्पादों की मांग की जा रही है।
मीनाक्षी ने बताया कि उनकी इकाई में लगभग 20 लोगों को रोजगार दिया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। ऑफ सीजन में भी कम से कम आधा दर्जन महिलाओं को रोजगार देती हैं। शहर के सभी प्रमुख डिपार्टमेंटल स्टोर में हमारी इकाई में निर्मित उत्पाद उपलब्ध हैं। योजना की मदद से उनका व्यवसाय करने का सपना पूरा हो गया और वे अन्य महिलाओं की मदद करने योग्य हो गई हैं। अभी फिलहाल सीजन के हिसाब से हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही हैं, क्योंकि होली करीब है।
मीनाक्षी ने बताया है कि दिन-ब-दिन उनका व्यवसाय बढ़ रहा है जिसके लिए अब जगह छोटी पड़ने लगी है। ऐसे में वह सरकार की ओर से चलाई जा रही किसी योजना से एक बड़ी जगह के लिए लोन लेने की तैयारी कर रही हैं।