'लैंड फॉर जॉब' स्कैम में लालू के खिलाफ आरोप तय किए जाने पर सुधाकर सिंह बोले, यह सत्ता का दुरुपयोग

'लैंड फॉर जॉब' स्कैम में लालू के खिलाफ आरोप तय किए जाने पर राजद सांसद ने कहा- यह सत्ता का दुरुपयोग


पटना, 11 जनवरी। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ 'लैंड फॉर जॉब' स्कैम में आरोप तय किए जाने पर प्रतिक्रिया दी है। रविवार को उन्होंने कहा कि यह सत्ता का दुरुपयोग है। एक राजनीतिक दल को तबाह करने के लिए सरकार हथकंडे अपनाती है।

सुधाकर सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "हर दो-तीन साल में नए मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। इस 'लैंड फॉर जॉब' स्कैम में अब तीसरी चार्जशीट दायर की गई है। जब पहली चार्जशीट दायर की गई थी, तो हमारे नेताओं को बरी कर दिया गया था। दूसरी चार्जशीट भी दायर की गई थी और एक बार फिर हमारे नेताओं को बरी कर दिया गया। अब यह उसी मामले में तीसरी चार्जशीट है। आप देखेंगे कि हर बार जब मामले की सुनवाई होती है, तो कोर्ट उसे सुनता है और फिर उन्हें बरी कर देता है।"

सुधाकर सिंह ने कहा, "मोहन भागवत के बयान से साफ है कि वह मौजूदा सरकार से बहुत असंतुष्ट हैं। उनके पाले-पोसे और आगे बढ़ाए गए भाजपा नेताओं के अब दुनिया में कहीं भी कोई सार्थक संबंध या हैसियत नहीं दिखती। आज कोई भी देश भारत के साथ खड़ा नहीं दिख रहा है। विदेश नीति निचले स्तर पर है, जहां प्रधानमंत्री का भी कोई सम्मान नहीं रहा है।"

राजद सांसद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बयान, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति या नाटो देश के राष्ट्राध्यक्ष, लगातार प्रधानमंत्री के विरुद्ध बात करते हैं।

राजद सांसद ने राम मंदिर में एक कश्मीरी व्यक्ति के घुसने की घटना को 'छोटी बात' करार दिया। उन्होंने कहा, "ये छोटी-मोटी बातें हैं। धार्मिक स्थल आस्था के केंद्र होते हैं, जहां लोग स्वाभाविक रूप से आते हैं और हम भी वहां जाते हैं। जब भी हम तीर्थयात्रा पर जाते हैं, तो हम उस देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करते हैं। अगर कोई हिंदू बनना चाहता है या हिंदू धार्मिक स्थलों पर पूजा करने आता है तो इसमें अपमान या सुरक्षा को खतरे की बात कहां से आती है?"

उन्होंने कहा, "अगर कोई व्यक्ति आए और स्थल को तोड़ दे, अपमान वह होता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति मंदिर प्रांगण में आकर पूजा करे तो उसमें आपत्ति कैसे हो सकती है?"
 
अजीब तर्क है! अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो जांच तो होगी ही। जांच को 'सत्ता का दुरुपयोग' बताकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। अगर नेता पाक-साफ हैं तो उन्हें कोर्ट की प्रक्रिया से डरना क्यों चाहिए? दूध का दूध और पानी का पानी अदालत में हो ही जाएगा।
 

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