सिडबी सर्वे: वैश्विक खतरों के बावजूद MSME का बढ़ा विश्वास, घरेलू माहौल ने दी कारोबार को नई उड़ान

वैश्विक जोखिमों के बावजूद एमएसएमई क्षेत्र में बढ़ा भरोसा: सिडबी सर्वे


नई दिल्ली, 24 फरवरी। मंगलवार को जारी सिडबी (एसआईडीबीआई) के आउटलुक सर्वे के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए एमएसएमई बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (एम-बीसीआई) में साल-दर-साल आधार पर सुधार दर्ज किया गया है। वैश्विक जोखिमों के बावजूद घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल ने मजबूती से समर्थन दिया है।

सर्वे में बताया गया कि वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) और कुल वित्त उपलब्धता में सबसे ज्यादा सुधार देखा गया। बिक्री और समग्र कारोबारी माहौल में भी सुधार हुआ है, जो मजबूत मांग और स्थिर परिचालन स्थिति को दर्शाता है। सालाना आधार पर भावनाओं (सेंटिमेंट) में सुधार का मुख्य कारण अनुकूल घरेलू आर्थिक माहौल रहा, भले ही बाहरी चुनौतियां बनी रहीं।

सर्वे से पता चलता है कि एमएसएमई निर्यातकों ने आरबीआई के ट्रेड रिलीफ उपायों और निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएसई) जैसी नीतिगत सहायता योजनाओं में रुचि दिखाई है। 43 प्रतिशत उत्तरदाता आरबीआई की ट्रेड रिलीफ योजना का लाभ लेने की योजना बना रहे हैं, 46 प्रतिशत सीजीएसई अपनाने का इरादा रखते हैं, जबकि लगभग 37 प्रतिशत दोनों विकल्पों का उपयोग करना चाहते हैं।

स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) ने अपने "एमएसएमई आउटलुक सर्वे" का पांचवां संस्करण जारी किया। यह एक तिमाही प्रकाशन है, जो भारत के एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा कारोबारी स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी देता है।

सर्वे में यह भी कहा गया है कि नए श्रम संहिता (लेबर कोड) एमएसएमई को अपने संचालन ढांचे को मजबूत करने और औपचारिकता को आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं। सर्वेक्षण में शामिल 34-36 प्रतिशत कंपनियों को अल्पकाल में अनुपालन लागत बढ़ने की आशंका है, वहीं कई कंपनियों ने सुझाव दिया कि स्पष्ट दिशानिर्देश (16-21 प्रतिशत) और बेहतर प्रशिक्षण व जागरूकता पहल (17-19 प्रतिशत) इस बदलाव को आसान बना सकती हैं। साथ ही सर्वेक्षण में कहा गया है कि सफल और सहज क्रियान्वयन के लिए क्षमता निर्माण आवश्यक होगा।

एमएसएमई का भरोसा तिमाही आधार पर भी स्थिर बना हुआ है, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आने से विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक दृष्टिकोण देखा गया। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए समग्र एम-बीसीआई 60.8 आंका गया है। सेक्टर के हिसाब से मैन्युफैक्चरिंग में सुधार हुआ और इसका एम-बीसीआई 62.9 से बढ़कर 64.1 हो गया, जबकि ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर में थोड़ी नरमी देखी गई।

समग्र एम-बीईआई (बिजनेस एक्सपेक्टेशन इंडेक्स) भी सकारात्मक संकेत दे रहा है। अगले तिमाही में यह 63.7 और एक साल बाद (अक्टूबर-दिसंबर 2026) 65.0 तक पहुंचने का अनुमान है, जो निकट भविष्य में आशावादी कारोबारी माहौल को दर्शाता है।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बिक्री को लेकर भरोसा मजबूत रहा और भविष्य में बिक्री बढ़ने की उम्मीद भी ज्यादा है। हालांकि सर्विस और ट्रेडिंग सेक्टर में मौजूदा तिमाही में बिक्री भावनाओं में खास सुधार नहीं दिखा, लेकिन आने वाले समय के लिए उत्तरदाता आशावादी बने हुए हैं।

मौजूदा तिमाही में वर्किंग कैपिटल की उपलब्धता को लेकर आशावाद काफी बढ़ा है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सकारात्मक रुख दिखाया, जो पिछली तिमाही के 35 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह, कुल वित्त उपलब्धता को लेकर सकारात्मक भावना 47 प्रतिशत तक पहुंच गई।

सर्वे में कहा गया है कि सर्विस सेक्टर में वित्त से जुड़े संकेतकों पर भावनाओं में मामूली सुधार हुआ। वहीं, ट्रेडिंग सेक्टर में वर्किंग कैपिटल को लेकर भावनाएं कुछ कमजोर पड़ीं, लेकिन कुल वित्त उपलब्धता को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है।
 
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