उज्जैन, 24 फरवरी। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में बड़ी संख्या में भक्तों का आगमन देखने के लिए मिला।
बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार ब्रह्म मुहूर्त से ही देखने को मिली और पूरा परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा। सुबह 4 बजे बाबा की भस्म आरती के लिए मंदिर के पट खुले, जिसके बाद पुजारियों ने बाबा महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया और साथ ही भस्म आरती की।
बता दें कि यह भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इसमें बाबा भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का चंदन से शृंगार और माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया जाता है और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला अर्पित की जाती है।
भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। मंगलवार को बाबा को चन्द्र बेल पत्र से सजाया गया है।
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में मशहूर है। उज्जैन में दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। भस्म आरती का हिस्सा बनने के लिए भक्तों को पहले ही ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होता है और इस दिन भस्म आरती के लिए नंबर या टोकन लेना पड़ता है और भक्त उसी दिन दर्शन के लिए आते हैं। पंजीकरण के लिए मंदिर द्वारा निर्धारित शुल्क भी देना होता है।
भस्म आरती की प्रक्रिया में पहले ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया जाता है, फिर भस्म रमाई जाती है। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, त्रिपुंड, रुद्राक्ष, मुंडमाला और फूलों से सजाया जाता है। यह शृंगार प्रतिदिन अलग-अलग रूप में किया जाता है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। आज के 'चंद्र-कमल' शृंगार ने भक्तों का मन मोह लिया।