भारती एयरटेल का डिजिटल लेंडिंग में बड़ा धमाका, NBFC से झोंकेगी 20,000 करोड़ का विशाल निवेश

भारती एयरटेल का एनबीएफसी शाखा के जरिए फाइनेंस सेक्टर में बड़ा दांव; करेगी 20,000 करोड़ रुपए का निवेश


मुंबई, 23 फरवरी। भारती एयरटेल ने सोमवार को घोषणा की कि वह अपनी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) शाखा एयरटेल मनी लिमिटेड के जरिए डिजिटल लेंडिंग कारोबार का विस्तार करने के लिए अगले कुछ वर्षों में 20,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी।

टेलीकॉम कंपनी ने कहा कि यह नया निवेश भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत करेगा और देश में मौजूद क्रेडिट गैप को कम करने में मदद करेगा।

कुल 20,000 करोड़ रुपए के निवेश में से 70 प्रतिशत राशि एयरटेल स्वयं लगाएगी, जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि प्रमोटर समूह भारती एंटरप्राइजेज लिमिटेड के माध्यम से लाई जाएगी।

भारती एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा कि कंपनी के लेंडिंग प्लेटफॉर्म की सफलता यह दिखाती है कि वह तकनीक, डेटा और ग्राहकों के भरोसे को बड़े स्तर पर प्रभावी तरीके से जोड़ने में सक्षम है।

उन्होंने कहा, "हमारा एनबीएफसी विस्तार इस मजबूत आधार को और सुदृढ़ करता है और यह हमारे उस लक्ष्य को दर्शाता है जिसमें हम भरोसे, नवाचार और वित्तीय समावेशन पर आधारित भविष्य के लिए तैयार डिजिटल लेंडिंग कारोबार बनाना चाहते हैं।"

एयरटेल मनी लिमिटेड को 13 फरवरी 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एनबीएफसी लाइसेंस प्राप्त हुआ है।

कंपनी ने कहा कि यह कदम वित्तीय समावेशन को गहराई देने और देश भर के ग्राहकों को सरल, सुरक्षित और नवाचारी डिजिटल वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक रणनीतिक विस्तार है।

पिछले दो वर्षों में एयरटेल ने एक डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके माध्यम से अब तक 9,000 करोड़ रुपए से अधिक के लोन वितरित किए जा चुके हैं।

कंपनी ने बताया कि उसके लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (एलएसपी) मॉडल ने अनुशासित अंडरराइटिंग प्रक्रिया, बेहतर पोर्टफोलियो प्रबंधन और रियल-टाइम जोखिम निगरानी के कारण मजबूत वृद्धि हासिल की है।

उसने यह भी कहा कि 500 से अधिक डेटा वैज्ञानिकों द्वारा समर्थित डेटा और एनालिटिक्स इंजन से लैस उसका डिजिटल प्लेटफॉर्म तेज गति से विस्तार करने में सक्षम रहा है, जबकि ऋण प्रदर्शन भी संतोषजनक बना हुआ है।

नियामकीय आवश्यकताओं के तहत एयरटेल मनी ने स्पष्ट किया कि उसे आरबीआई अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन केंद्रीय बैंक कंपनी की वित्तीय स्थिति या उसकी देनदारियों की वापसी की गारंटी नहीं देता।
 

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