त्योहारों में प्राइवेट एयरलाइंस की मनमानी पर लगेगी लगाम! केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- अस्थिर हवाई किराए की उच्चस्तरीय जांच जारी

त्योहारों में प्राइवेट एयरलाइंस के अस्थिर किराए की जांच जारी, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी


नई दिल्ली, 23 फरवरी। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में प्राइवेट एयरलाइंस द्वारा लिए जाने वाले अस्थिर हवाई किराए और ऐड-ऑन फीस के मुद्दे की जांच की जा रही है।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें भारत के सिविल एविएशन सेक्टर में अपारदर्शी, शोषण करने वाले और एल्गोरिदम से चलने वाले प्राइसिंग तरीकों के साथ-साथ यात्रियों के लिए कॉम्प्लिमेंट्री चेक-इन बैगेज लिमिट में कमी को चुनौती दी गई थी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने कहा कि पिटीशन में उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार के हाई लेवल पर कंसल्टेशन चल रहा है।

केंद्र सरकार के लॉ ऑफिसर ने बताया कि सॉलिसिटर जनरल ने भी एक मीटिंग बुलाई है। हम मामले को हाई लेवल पर ले गए हैं। हम हाई अथॉरिटी से बातचीत कर रहे हैं। चार हफ्ते का समय दिया जा सकता है और हम एक काउंटर लेकर आएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अपना जवाब फाइल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया और मामले को 23 मार्च को आगे के विचार के लिए लिस्ट किया।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हवाई किराए में उतार-चढ़ाव और पीक ट्रैवल पीरियड के दौरान एक्स्ट्रा चार्ज लगाना बहुत गंभीर चिंता का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर चिंता है। वरना, हम आर्टिकल 32 की याचिकाओं पर विचार नहीं करते।

इसने फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) की उस याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें कार्यवाही में शामिल होने की मांग की गई थी, यह देखते हुए कि केंद्र सरकार कोई भी पॉलिसी फैसला लेने से पहले स्टेकहोल्डर्स से बात करेगी।

बेंच ने कहा कि केंद्र (सरकार) आपसे निपटेगी। वे फैसला लेने से पहले आपको बुलाएंगे। वे एक कमेटी बनाएंगे और फैसला लेंगे। यह मिनिस्ट्री को तय करना है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम बाद में इस पर विचार करेंगे।

इससे पहले, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन की ओर से दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिन्होंने कहा था कि हवाई यात्रा, जिसे एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट के तहत एक जरूरी सर्विस माना जाता है, अनरेगुलेटेड, अनप्रेडिक्टेबल और शोषण करने वाले किराए के तरीकों के कारण तेजी से महंगी होती जा रही है।

वकील चारु माथुर के जरिए फाइल की गई पिटीशन में कहा गया है कि इमरजेंसी, त्योहारों या पीक ट्रैवल पीरियड के दौरान अचानक किराए में बढ़ोतरी, जो कभी-कभी कुछ ही घंटों में दोगुनी या तिगुनी हो जाती है, उन पैसेंजर्स पर बहुत ज्यादा असर डालती है जिन्हें मेडिकल, एजुकेशन या नौकरी से जुड़े कारणों से अर्जेंट ट्रैवल करना पड़ता है।

इसमें आगे कहा गया कि एयरलाइंस ने बिना किसी सही वजह के कॉम्प्लिमेंट्री चेक-इन बैगेज अलाउंस 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया है, जिससे पहले से शामिल सर्विस असल में एक्स्ट्रा-बैगेज चार्ज के जरिए एक एक्स्ट्रा रेवेन्यू स्ट्रीम में बदल गई है।

इस तरह के तरीकों को मनमाना और संविधान के आर्टिकल 21 का उल्लंघन बताते हुए पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह केंद्र को एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने या एक इंडिपेंडेंट एविएशन टैरिफ रेगुलेटर बनाने का निर्देश दे, जिसके पास एयरफेयर स्ट्रक्चर की देखरेख करने, कम्प्लायंस पर नजर रखने और पैसेंजर की शिकायतों पर फैसला करने के लिए क्वासी-ज्यूडिशियल पावर्स हों।
 

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