राष्ट्रपति भवन में औपनिवेशिक निशान मिटे! द्रौपदी मुर्मू ने लुटियंस की जगह राजाजी की प्रतिमा का किया अनावरण

राष्ट्रपति भवन में एडविन लुटियंस की प्रतिमा हटाकर सी. राजगोपालाचारी को दी गई जगह, द्रौपदी मुर्मू ने किया अनावरण


नई दिल्ली, 23 फरवरी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 'राजाजी उत्सव' की शोभा बढ़ाई और राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।

राष्ट्रपति के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट किया कि अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन सीढ़ी पर स्थित चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा का स्थान ले लिया है।

यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत, शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने तथा भारत माता की सेवा में असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम औपनिवेशिक काल की विरासत से आगे बढ़ने और देश के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रख्यात भारतीय नेताओं को मान्यता देने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि राजगोपालाचारी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और विद्वान थे, जिन्होंने 1948 से 1950 तक भारत के अंतिम गवर्नर जनरल के रूप में कार्य किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और राजाजी के परिवार के सदस्य शामिल थे।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित 'राजाजी उत्सव' में भाग लिया, जहां भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया, जो औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की हमारी यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।"

इस आयोजन ने राष्ट्रीय प्रतीकों को सम्मानित करने और गणतंत्र की प्रमुख संस्थाओं के भीतर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करने पर सरकार के निरंतर जोर को रेखांकित किया।
 
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