उत्तराखंड: कर्मचारियों पर हमले बढ़े तो सख्त हुए सीएम धामी, सुरक्षा के लिए बनेगी विशेष एसओपी

उत्तराखंड: सरकारी कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए बनेगी एसओपी, मुख्यमंत्री धामी का निर्देश


देहरादून, 23 फरवरी। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए अहम कदम उठाया है। राज्य में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा के लिए एसओपी बनाई जाएगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड के सूचना और जनसंपर्क विभाग के अनुसार, सोमवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उन्होंने 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के साथ अन्य घटनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इसके साथ ही, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की गई।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कर्मचारी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान-सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर अधिकारी, कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने डीजीपी दीपम सेठ को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने एसएसपी देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री मुकेश बहुगुणा और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बयान में कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल सांस्कृतिक स्वरूप, सामाजिक समरसता और विधिसम्मत शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए संकल्पबद्ध है।

इसी बीच, सीएम धामी ने सीएए को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार की ओर से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू किया जाना एक ऐतिहासिक निर्णय है। इस कानून के तहत पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय के लोगों को भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।"

उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में भी 153 लोगों को नागरिकता प्रदान की गई है। यह कदम न केवल मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है, बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना को भी चरितार्थ करता है, साथ ही विश्व भर में रह रहे हिंदुओं को राष्ट्र गौरव से जोड़ता है।"
 

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