झारखंड के 48 नगर निकायों में बंपर वोटिंग! 43 लाख मतदाता तय करेंगे 6000 प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य

झारखंड के 48 नगर निकायों में मतदान को लेकर उत्साह, 6 हजार से अधिक प्रत्याशियों की किस्मत लिखेंगे 43 लाख वोटर


रांची, 23 फरवरी। झारखंड के 48 शहरी निकायों में नगर सरकार के गठन के लिए सोमवार सुबह सात बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है। राज्य भर के 4,304 मतदान केंद्रों पर मतदाता उत्साह के साथ कतारों में खड़े नजर आए।

सुबह से ही बूथों के बाहर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं, जिनमें युवाओं से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। मतदान शाम पांच बजे तक चलेगा। मेयर और अध्यक्ष पद के लिए 562 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि वार्ड पार्षद पद के लिए 5,562 अधिक प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं। 16 निकायों के 38 वार्डों में वार्ड पार्षद पद पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। सभी नगर निकायों में वार्डों की संख्या 1,087 है। सभी प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य 8,678 मतपेटियों में कैद हो जाएगा।

मतगणना 27 फरवरी को सुबह आठ बजे से शुरू होगी। राज्य के कुल 43,33,574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 22,07,203 पुरुष, 21,26,227 महिला और 144 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। यह चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहा है, हालांकि विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। मतदाता मेयर-अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पद के लिए वोट डाल रहे हैं।

राज्य में नौ नगर निगमों रांची, धनबाद, देवघर, आदित्यपुर, चास, मेदिनीनगर, हजारीबाग, गिरिडीह और मानगो के अलावा 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में मतदान हो रहा है। नगर निकाय का चुनाव गैरदलीय आधार पर हो रहा है, लेकिन सभी दलों ने चुनाव में पूरी ताकत झोंकी है। सभी निकायों में विभिन्न दलों के समर्थित प्रत्याशी मैदान में डटे हैं, जिनके लिए दलों के नेताओं ने प्रचार अभियान में खूब पसीना बहाया है।

मतदान के दौरान संबंधित क्षेत्रों में ड्राई-डे लागू किया गया है और शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को हर दो घंटे पर राज्य निर्वाचन आयोग को स्थिति रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। किसी भी गड़बड़ी की शिकायत के लिए नागरिक आयोग के हेल्पलाइन नंबर 8987791131 और कंट्रोल रूम नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं।

इस बार के चुनाव कई मायनों में अहम माने जा रहे हैं। पहली बार नगरीय निकायों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। इससे शहरी शासन में व्यापक और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
 
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