चेन्नई, 22 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने रविवार को डीएमके सरकार पर तीखा हमला बोला। भाजपा ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को गंभीर रूप से बिगड़ा हुआ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में विफल रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में चरमपंथी गतिविधियों और अवैध प्रवासियों की मौजूदगी चिंता का विषय बनती जा रही है।
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने आरोप लगाया कि मौजूदा डीएमके शासन में तमिलनाडु तेजी से चरमपंथी तत्वों के लिए शरणस्थल बनता जा रहा है।
उन्होंने दिल्ली पुलिस द्वारा तिरुप्पुर में हाल ही में गिरफ्तार किए गए छह बांग्लादेशी नागरिकों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वे कथित रूप से पाकिस्तान स्थित एक आतंकी संगठन के लिए जासूसी गतिविधियों में शामिल थे और सोशल मीडिया पर उस संगठन के समर्थन में सामग्री साझा कर रहे थे।
नागेंद्रन ने कहा कि तिरुपुर, कोयंबटूर और कोंगू क्षेत्र के अन्य हिस्सों में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की बार-बार गिरफ्तारी राज्य की प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जैसी केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा तमिलनाडु में अभियान चलाना इस बात का संकेत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की सतर्कता पर्याप्त नहीं है।
नागेंद्रन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के प्रति डीएमके की राजनीतिक शत्रुता राज्य की सार्वजनिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने कहा, “डीएमके को यह समझना होगा कि तुष्टीकरण की राजनीति राष्ट्र की सुरक्षा की कीमत पर नहीं हो सकती। कम से कम अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में सरकार को तमिलनाडु में छिपे आतंकवादी तत्वों की पहचान कर उन्हें जड़ से खत्म करना चाहिए।”
इसी मुद्दे पर भाजपा नेता और तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी डीएमके सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो राज्य कभी शांतिपूर्ण माना जाता था, वह अब आतंकवादियों, असामाजिक तत्वों, अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करों और कुख्यात अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है।
अन्नामलाई ने राज्य प्रशासन के कामकाज की आलोचना करते हुए दावा किया कि वरिष्ठ सिविल सेवकों को शासन से हटाकर ठेकेदारों के लिए निविदाएं तय करने जैसे कार्यों में लगाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपने मुख्य मतदाता आधार को संतुष्ट करने के नाम पर गंभीर मुद्दों पर मूक दर्शक बनी हुई है, हालांकि इन आरोपों पर डीएमके सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।