अयोध्या, 22 फरवरी। रामनगरी अयोध्या रविवार को एक ऐतिहासिक और भक्ति से ओतप्रोत दिन देख रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित ‘श्रीरामार्चनम्’ कार्यक्रम के तहत श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में पहली बार संघ का विशेष घोष वादन गूंजा।
फाल्गुन शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर दिल्ली प्रांत से आए 100 प्रशिक्षित स्वयंसेवक वादकों ने रामलला की आराधना में सामूहिक घोषवादन, स्तुति और पथ संचलन का मनोहारी प्रदर्शन किया।
यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष (100 वर्ष पूरे होने) के उत्सव का हिस्सा है, जिसमें भक्ति, अनुशासन और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। महीनों से चल रहे कठोर अभ्यास के बाद तैयार यह घोष दल वेणु (बांसुरी), श्रृंग (स्वरद, तुर्य, नागांग, गौमुख) और शंख जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों से विभिन्न रागों और रचनाओं का वादन कर रहा है। कार्यक्रम में 25 स्वयंसेवकों के परिवारजन भी उपस्थित रहे, जिससे यह और भी हृदयस्पर्शी बन गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सरयू घाट पर हुई, जहां स्वयंसेवकों ने सरयू वंदना के साथ घोषवादन शुरू किया। इसके बाद लता मंगेशकर चौक पर दूसरा सत्र आयोजित हुआ, जहां बलिदानी कारसेवकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। फिर राम पथ पर पथ संचलन निकाला गया, जो हनुमानगढ़ी पहुंचा।
यहां स्तुति वादन के बाद दल श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचा, जहां रामलला की अर्चना, आरती और स्थिर वादन हुआ। अंत में मंदिर तीर्थ क्षेत्र का भ्रमण कर स्वयंसेवकों ने भगवान राम के प्रति अपनी समर्पण भावना व्यक्त की।
यह आयोजन न केवल धार्मिक है, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है। राम मंदिर के निर्माण के बाद यह पहला ऐसा बड़ा घोष वादन कार्यक्रम है, जो संघ की लंबे समय से चली आ रही राम भक्ति और कारसेवा की परंपरा को जीवंत करता है। स्वयंसेवकों की एकरूपता, अनुशासन और समर्पण ने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।