नई दिल्ली, 22 फरवरी। संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) में मिलाए जाने वाले बायोगैस पर प्रस्तावित एक्साइज ड्यूटी छूट से भारत में करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक के निवेश आने की संभावना है। यह जानकारी इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने रविवार को दी।
उद्योग जगत के संगठन ने कहा कि हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 में घोषित यह कदम स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और भारत के 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य को समर्थन देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आईबीए के अनुसार, सीएनजी के साथ मिश्रित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) पर एक्साइज ड्यूटी छूट से परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर होगी और बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित होगा।
एसोसिएशन ने कहा कि यदि अगले पांच वर्षों में देश भर में सिटी गैस वितरण नेटवर्क बायोगैस का सिर्फ 5 प्रतिशत मिश्रण भी हासिल कर लेते हैं, तो इसके लिए सालाना करीब 2.5 से 3 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटीपीए) सीबीजी की जरूरत होगी।
सिर्फ इससे ही 45,000 करोड़ रुपए से 55,000 करोड़ रुपए तक का निवेश उत्पन्न हो सकता है।
आईबीए ने कहा कि यदि सरकार स्पष्ट और स्थिर नीति ढांचा तथा पूर्वानुमान योग्य मूल्य निर्धारण व्यवस्था देती है, तो 2032 तक मिश्रण स्तर 7-8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में कुल निवेश क्षमता लगभग दोगुनी होकर करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।
आईबीए ने कहा कि यह एक्साइज छूट लंबे समय से चली आ रही असमानता को दूर करती है, क्योंकि सीबीजी एक नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ईंधन होने के बावजूद पहले सीएनजी की तरह ही कर के दायरे में था।
मिश्रित ईंधन में बायोगैस हिस्से पर एक्साइज हटाने से यह अधिक किफायती हो जाएगा।
सिटी गैस वितरण कंपनियों के लिए इसका मतलब होगा कि औसत ईंधन लागत कम होगी। उपभोक्ताओं को स्थिर या कम गैस कीमतों का लाभ मिल सकता है, जबकि उत्पादकों को सुनिश्चित बिक्री और स्थिर आय का स्रोत मिलेगा।
आईबीए के अनुसार, यह नीति बदलाव निजी निवेश को तेज कर सकता है, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देगा।
भारत में धान की पराली, प्रेस मड, नगर निगम का ठोस कचरा और गोबर जैसे जैविक कचरे से सालाना करीब 60 मिलियन टन सीबीजी उत्पादन की क्षमता है।
एक्साइज छूट से 4.8 से 10 टन प्रतिदिन क्षमता वाले सामान्य संयंत्रों की आंतरिक रिटर्न दर (आईआरआर) बेहतर होने की उम्मीद है, जो फीडस्टॉक और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर करेगी।
इस सुधार से पहले जो परियोजनाएं आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं थीं, उन्हें अब वित्तपोषण मिलने में मदद मिल सकती है।
सीबीजी अपने पूरे जीवनचक्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 70 से 90 प्रतिशत तक कम कर सकता है, खासकर जब इसे कृषि अपशिष्ट से तैयार किया जाए।
आईबीए ने कहा कि यदि 10 प्रतिशत मिश्रण स्तर हासिल किया जाता है, तो हर साल 12 से 15 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2)-समतुल्य कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों के लिए बड़ा कदम साबित होगा।