भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 'डील' नहीं 'दबाव' : जयराम रमेश

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 'डील' नहीं 'दबाव' : जयराम रमेश


नई दिल्ली, 22 फरवरी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संतुलित समझौते का मतलब 'लेना और देना' होता है, लेकिन जब केवल दिया जाए और बदले में बहुत कम मिले, तो उसे समझौता नहीं बल्कि दबाव कहा जाएगा।

जयराम रमेश ने कहा कि वे किसी तरह का आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि तथ्यों के आधार पर बात कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे भी तथ्यों के आधार पर ही सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर किसान संगठन और किसान इस समझौते को लेकर चिंतित क्यों हैं।

जयराम रमेश ने अमेरिका की व्यापार नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप समय-समय पर टैरिफ में बदलाव करते रहते हैं, तो भारत ऐसा क्यों नहीं करता? उनके अनुसार यदि कोई समझौता होता है तो वह बराबरी के आधार पर होना चाहिए, लेकिन इस समझौते में भारत की ओर से अधिक रियायतें दी गई हैं, जबकि बदले में बहुत कम लाभ मिला है।

कांग्रेस राज्यसभा सदस्य ने चेतावनी दी कि इस समझौते का प्रभाव आने वाले महीनों में दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि आयात को अधिक उदार बनाया जा रहा है और आयात शुल्क कम किए जा रहे हैं। उनके अनुसार स्थिति ऐसी बन रही है कि अभी आयात बढ़ेगा, जबकि निर्यात का लाभ लंबे समय बाद मिल सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में देश के हित कैसे सुरक्षित रहेंगे।

संसद के कामकाज पर भी जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद को सुचारू रूप से चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की होती है। विपक्ष की भी भूमिका है, लेकिन सरकार संसद चलने नहीं देती। राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि कई सांसद विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ निराधार और आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
 

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