चेन्नई, 22 फरवरी। मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी विभाग (डीवीएसी) को नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति मंत्री केएन नेहरू के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सियासत गर्मा गई है। तमिलनाडु भाजपा ने रविवार को सत्तारूढ़ डीएमके सरकार से मंत्री को हटाने की मांग की है।
तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कहा कि कोर्ट का आदेश डीएमके सरकार के लिए एक गंभीर झटका है। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से केएन नेहरू को तुरंत मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। एएनएस प्रसाद ने सीबीआई से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि केवल केंद्रीय एजेंसी से ही अनियमितताओं की व्यापक और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सकेगी।
मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से लगाए गए आरोपों और उसके सामने पेश साक्ष्यों पर विचार करते हुए यह निर्देश जारी किया।
अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक को दी गई शिकायत में ईडी ने नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग के भीतर नियुक्तियों और निविदा प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
आरोप है कि इसमें 630 करोड़ रुपए से लेकर 1,020 करोड़ रुपए तक की वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं। एजेंसी ने दावा किया कि 2,538 नियुक्तियों के संबंध में प्रति पद 25 से 35 लाख रुपए तक की रिश्वत ली गई।
ईडी ने कोर्ट के समक्ष डिजिटल साक्ष्य भी रखे, जिनमें व्हाट्सएप बातचीत, स्क्रीनशॉट, स्थानांतरण आदेश और वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं, जो कथित तौर पर मंत्री से जुड़े व्यक्तियों से संबंधित परिसरों में की गई तलाशी के दौरान बरामद किए गए थे।
तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश ने भाजपा के इस लंबे समय से चले आ रहे आरोप को और मजबूत किया है कि डीएमके शासन के दौरान भ्रष्टाचार एक व्यापक समस्या है।
डीएमके ने अभी तक इस ताजा घटनाक्रम पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के निर्देश का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है।
2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा भाजपा और सत्ताधारी डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।