रामनाथपुरम में मछुआरे गुस्से में: श्रीलंकाई नौसेना ने पकड़े 22, हड़ताल कर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार

रामनाथपुरम में मछुआरों की हड़ताल, 22 की गिरफ्तारी के बाद केंद्र से हस्तक्षेप की मांग


रामनाथपुरम, 21 फरवरी। श्रीलंकाई नौसेना द्वारा इस सप्ताह 22 भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को रामनाथपुरम तट के कई हिस्सों में मछली पकड़ने की गतिविधियां पूरी तरह ठप रहीं। विभिन्न मछुआरा संगठनों ने एक दिवसीय हड़ताल कर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

मछुआरा संघों के नेताओं के अनुसार, रामेश्वरम और मंडपम के मछुआरों को लगभग तीन दिन पहले पाल्क स्ट्रेट में मछली पकड़ने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। श्रीलंकाई नौसेना ने कथित तौर पर कच्चातीवु और नेदुंथीवु द्वीपों के पास चार मैकेनाइज्ड ट्रॉलर सहित मछुआरों को हिरासत में लिया।

गिरफ्तार मछुआरों को बाद में श्रीलंका की एक अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। विरोध स्वरूप शनिवार को मछुआरों ने समुद्र में न उतरने का फैसला किया।

थंगाचिमदम में आयोजित प्रदर्शन में 400 से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें नाव मालिक और चालक दल के सदस्य भी थे। मछुआरा नेता जेसु राजा ने केंद्र सरकार पर समय रहते हस्तक्षेप न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब तमिलनाडु के मछुआरों को बार-बार हिरासत में लिया जा रहा है, तब केंद्र सरकार को “मूक दर्शक” नहीं बने रहना चाहिए।

उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पाल्क स्ट्रेट में गिरफ्तारी का मुद्दा उच्चतम कूटनीतिक स्तर पर उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे श्रीलंकाई नेतृत्व से बात कर ऐसी घटनाओं को रोकने की मांग की।

स्थानीय मछुआरों का कहना है कि वे पारंपरिक रूप से पाल्क स्ट्रेट पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही गिरफ्तारियों से कई परिवार आर्थिक संकट में हैं। पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंकाई अधिकारियों ने कई मैकेनाइज्ड नौकाएं जब्त की हैं और उन्हें वापस नहीं किया है।

मछुआरा संघों का दावा है कि 100 से अधिक भारतीय ट्रॉलर अभी भी श्रीलंका की हिरासत में हैं, जिससे कर्ज में डूबे नाव मालिकों को भारी नुकसान हो रहा है। आर्थिक नुकसान के अलावा इन गिरफ्तारियों का सामाजिक प्रभाव भी पड़ रहा है। हिरासत में लिए गए मछुआरों के परिवारों को श्रीलंकाई अदालतों द्वारा लगाए गए जुर्माने की व्यवस्था करनी पड़ती है। जुर्माना न भर पाने की स्थिति में लंबी कैद का खतरा बना रहता है, जिससे परिवारों खासकर महिलाओं और बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है।

प्रदर्शन कर रहे मछुआरों ने केंद्र सरकार से स्थायी कूटनीतिक समाधान निकालने, गिरफ्तार मछुआरों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने और जब्त की गई नौकाओं को वापस दिलाने की मांग की है, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।
 

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