झारखंड निकाय चुनाव: प्रचार थमा, अब 23 फरवरी को जनता चुनेगी अपना महापौर और पार्षद, किसकी बनेगी सरकार

झारखंड में नगर निकाय चुनाव के लिए थमा प्रचार, 23 फरवरी को होगा मतदान


रांची, 21 फरवरी। झारखंड के 48 नगर निकायों में 23 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए शनिवार की शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम गया। सभी नगर निकायों में 23 फरवरी को सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक एक ही चरण में मतदान होगा।

मतगणना 27 फरवरी को सुबह आठ बजे से शुरू की जाएगी। राज्य में कुल 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन निकायों में मेयर और अध्यक्ष के अलावा कुल 1,087 वार्डों में काउंसिलर के लिए मतदान होगा। इनमें से 16 निकायों के 38 वार्डों में वार्ड पार्षद पद के लिए निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। केवल एक प्रत्याशी के मैदान में रहने के कारण उन्हें निर्वाची पदाधिकारियों द्वारा निर्वाचित घोषित किया गया।

नामांकन और छंटनी की प्रक्रिया के बाद कुल 6,288 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 560 तथा वार्ड पार्षद पद के लिए 5,728 उम्मीदवार अंतिम सूची में शामिल हैं। इससे पहले 38 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए थे और 424 नामांकन पत्र जांच में रद्द किए गए थे। प्रचार थमने के बाद अब न तो कोई चुनावी सभा होगी और न ही जुलूस निकाले जा सकेंगे। हालांकि प्रत्याशी मतदाताओं से संपर्क के लिए डोर-टू-डोर प्रचार जारी रख सकेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। शनिवार से ही कई जिलों में पोलिंग पार्टियां अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होनी शुरू हो गईं, जबकि कुछ स्थानों पर मतदान कर्मी रविवार को प्रस्थान करेंगे। मतदान बैलेट पेपर के जरिए होगा और इस बार मतदाताओं को नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं रहेगा। यानी मतदाता को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से किसी एक को ही वोट देना होगा।

मतदान के दिन संबंधित क्षेत्रों में ड्राई-डे लागू रहेगा और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों को हर दो घंटे पर राज्य निर्वाचन आयोग को स्थिति रिपोर्ट भेजनी होगी, ताकि किसी भी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इस बार के नगर निकाय चुनाव कई मायनों में अहम माने जा रहे हैं।

पहली बार नगरीय निकायों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व बढ़ने और शहरी शासन में विविध भागीदारी सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रचार थमने के साथ ही प्रशासन की प्राथमिकता शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करना है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन ने सभी नगर निकायों में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। शनिवार को रांची सहित कई शहरों में पुलिस और सुरक्षा बलों ने चुनाव के मद्देनजर फ्लैग मार्च किया।
 
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