ट्रंप को बड़ा झटका! अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ अभियान को बताया अवैध, अशोक मित्तल ने फैसले का किया जोरदार स्वागत

अशोक मित्तल ने टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत


नई दिल्ली, 21 फरवरी। अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के आए ताजा फैसले को लेकर भारत में विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए विस्तृत जानकारी साझा की।

उन्होंने कहा कि 27 अगस्त 2025 को अमेरिका ने टैरिफ दर 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी थी। इससे पहले भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था। अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ अभियान को अवैध बताते हुए कहा है कि यह 1970 के उस कानून के प्रावधानों के खिलाफ था, जिसके तहत ऐसे कदम उठाए जा सकते थे।

अशोक मित्तल ने फैसले का स्वागत करते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि अदालत ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया, जिसमें दो न्यायाधीश वे भी शामिल थे जिन्हें ट्रंप ने स्वयं नियुक्त किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ 10 प्रतिशत तक आने को सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने आईएएनएस से कहा कि सरकार को तुरंत इस बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। आमतौर पर राज्यसभा में मंत्री बयान देने के बाद स्पष्टीकरण और सवालों के लिए अवसर देते हैं, लेकिन इस बार वह परंपरा भी नहीं निभाई गई। इस तरह की चुप्पी से अनिश्चितता बढ़ती है और सभी शंकाओं को दूर करना आवश्यक है।

पटना में राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप इस फैसले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, "अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया है या अमेरिका क्या करता है, यह अमेरिका का मामला है। अमेरिका ने हम पर जो 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, उससे हमारे व्यापारियों को राहत मिलती है या नहीं, यह हमें देखना है। आज, जो भाजपा वाले अमेरिका कोर्ट के फैसले का जश्न मना रहे हैं, उन्हें कम से कम यह तो देखना चाहिए कि निचली अदालतों से लेकर ऊपर तक वहां का ज्यूडिशियल सिस्टम कितना आजाद है, जबकि भारत में, राहुल गांधी को गुजरात की अदालतों में मानहानि के एक केस में दो साल की सजा मिलती है, यह शर्मनाक है।"
 
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