1700 साल पुराना भटनेर किला: राजपूतों से मुगलों तक ने किया राज, फिर भी कैसे रहा यह अजेय?

राजपूतों से लेकर मुगलों तक ने किया राज, कई आक्रमणों के बावजूद मजबूती से टिका है भटनेर का किला


नई दिल्ली, 21 फरवरी। राजनीति और सत्ता की लड़ाई केवल मैदानों और दरबारों में ही नहीं लड़ी गई, बल्कि उन किलों में भी लड़ी गई जहां बैठकर युद्ध की रणनीतियां तय होती थीं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में आज भी कई ऐसे ऐतिहासिक किले मौजूद हैं, जो राजपूतों के संघर्ष, पराक्रम और अदम्य साहस की गाथा सुनाते हैं।

एक ऐसा ही एक है भटनेर का किला, जिसे वर्तमान में हनुमानगढ़ किले के नाम से भी जाना जाता है। भटनेर का किला भारत के सबसे पुराने और मजबूत किलों में से एक है, जिस पर राजपूतों से लेकर मुगलों तक ने राज किया।

भटनेर के किले का इतिहास और शौर्य की कहानी रक्तरंजित है क्योंकि इस किले पर एक बार नहीं बल्कि कई बार मुगलों ने आक्रमण किया। किले को वापस पाने के लिए भट्टी राजपूतों ने भी अपनी जान की आहुति दी और आखिरी बार बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने किले और शहर दोनों पर राज किया। 1700 साल से ज्यादा पुराना किला आज भी मजबूती के साथ खड़ा है और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

किले का आर्किटेक्चर और इतिहास दोनों ही जानने लायक हैं। किले का निर्माण जैसलमेर के राजा भट्टी के पुत्र भूपत राजपूर ने कराया था। तब से लेकर अब तक किले पर तैमूर, गजनवी, पृथ्वीराज चौहान, अकबर, कुतुब-उद-दीन-ऐबक और राठौर का कब्जा रहा है। किले की मजबूती और इतिहास के बारे में मुगलों ने भी अपनी किताबों में चर्चा की है। तैमूर द्वारा लिखित आत्मकथा "तुजुक-ए-तैमूरी" और मुगल बादशाह अकबर पर आधारित किताब "आइन-ए-अकबरी" में किले की मजबूती और ताकत का उल्लेख किया गया है।

भटनेर का किला साधारण नहीं है, बल्कि इसने मध्य एशिया से भारत के बीच एक बैरिकेड की तरह काम किया और दुश्मनों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया। किले की ऊंची और मजबूत दीवारें दुश्मनों के हौसले को परास्त करती हैं और बीच की खाई को पार करना किसी के बस की बात नहीं। किले की किलेबंदी में पानी ने हमेशा अहम भूमिका निभाई है, जो सिर्फ स्टोरेज के लिए नहीं बल्कि दुश्मनों की राह रोकने के लिए भी काफी रहा है।

किले के चारों ओर कई विशाल द्वार हैं और कई बड़े गोल गढ़ हैं जो अंतराल पर खड़े हैं। इन विशाल द्वार और गोल गढ़ को मुगल शासकों ने सुरक्षा की दृष्टि से बनाया था। किले के अंदर 52 कुंड और भगवान शिव और हनुमान जी के कई मंदिर भी मौजूद हैं। इसके साथ ही मुगल शासक द्वारा बनवाया मकबरा भी मौजूद है, जिसे शेर खान का बताया जाता है। शेर खान सुल्तान गयास-उद-दीन-बलबन के भतीजे और किले की बागडोर संभालने वाले मुगल योद्धा थे।

अगर आपको भी इतिहास से प्यार है तो भटनेर का किला आपको शानदार अनुभव दे सकता है। किला हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर है और किले को देखने के लिए किसी तरह की फीस भी नहीं देनी पड़ती। पुरातत्व विभाग किले की मरम्मत समय-समय पर कराता रहता है।
 
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